जनपद में हर माह विभाग द्वारा शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत वसूली के लिए अभियान चलाकर राजस्व वसूली की जाती है। इसके लिए उपखंड अधिकारियों द्वारा अवर अभियंताओं के नेतृत्व में टीमें बनाकर घर-घर जाकर वसूली की जाती है। विद्युत वसूली के लिए घरेलू व कामर्शियल उपभोक्ताओं को हर माह की 10 तारीख को लखनऊ से डाटा आने के बाद कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से विद्युत बिलिंग कराई जाती है। जबकि, बड़े संयोजनों के विद्युत बिल विभाग द्वारा एमआरआई कराने के बाद उपभोक्ताओं को दिए जाते हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमों द्वारा राजस्व वसूली की जाती है। इसके लिए अधिकारियों के निर्देश पर अधिशासी अभियंता द्वारा हर उपखंड अधिकारी को बिजली खपत के अनुसार राजस्व वसूली करने के लिए निर्धारित लक्ष्य दिया जाता है, लेकिन बहुत कम ही ऐसा होता है कि अधिकारियों द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष शत- प्रतिशत राजस्व वसूली की जा सकी हो। इसमें काफी हद तक पूर्व से चली आ रही विभागीय कार्यप्रणाली जिम्मेदार है, जिसकी वजह से विभाग द्वारा शत- प्रतिशत राजस्व वसूली प्रभावित बनी रहती है। इसी के चलते जून माह में दिए गए राजस्व वसूली के लक्ष्य के सापेक्ष जनपद के तीनों उपखंड अधिकारियों द्वारा काफी कम राजस्व वसूली की जा सकी। यह आंकड़े हर माह विभाग द्वारा कार्पोरेशन को भी भेजे जाते हैं। इसके चलते अधिकारियों द्वारा मई व जून माह में काफी कम राजस्व वसूले जाने पर नाराजगी भी व्यक्त की गई थी। स्थिति यह रही कि पिछले माह जिले की कुल राजस्व वसूली साढ़े छह करोड़ रुपए रही, जबकि नौ करोड़ रुपये की वसूली होनी चाहिए थी।
इसे गंभीरता से लेते उच्च अधिकारियों के निर्देश पर अब अधिशासी अभियंता प्रशांत सिंह ने विगत दो महीने के बकाया लक्ष्य को जुलाई माह में समाहित करके तीनों उपखंड अधिकारियों को 12.60 करोड़ रुपए राजस्व वसूलने का लक्ष्य दिया है। इसके अंतर्गत उपखंड अधिकारी प्रथम को 4.20 करोड़ रुपये, उपखंड अधिकारी द्वितीय को 6.30 करोड़ रुपए और उपखंड अधिकारी तृतीय को 2.10 करोड़ रुपए के राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया है। हालांकि, यदि शहरी क्षेत्र के अंतर्गत उपखंड अधिकारी प्रथम द्वारा जून माह में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का राजस्व वसूल किया गया था।