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किसानों की आवाज बुलंद करने वाला चाहिए विधायक

Tue, 07 Feb 2017 12:29 AM IST
lalitpur
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किसानों की आवाज बुलंद करने वाला चाहिए विधायक - फोटो : demo
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सिलावन (ललितपुर)। बुंदेलखंड के किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। पिछले कई वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे धरती पुत्रों पर सियासत तो खूब हुई, लेकिन उनके जख्मों पर ऐसा मलहम लगाने की कोशिश किसी ने भी नहीं की, जिससे उनको हकीकत में राहत मिलती। ऐसे विषम हालातों से गुजर रहे किसानों को जनप्रतिनिधियों से अब ठोस पहल किए जाने की दरकार हैं। वह चाहते हैं कि उन्हें तकनीकी खेती से जोड़कर उन्नत किया जाए। कृषि अनुसंधान केन्द्र की स्थापना कराई जाए, आवारा जानवरों आदि से फसल की सुरक्षा के लिए ठोस उपाए किए जाएं, हर खेत को पानी मिल सके ऐसे उपाय किए जाएं। इसके अलावा उनकी मंशा है कि किसानों के लिए संचालित योजनाओं का धरातल पर पारदर्शी क्रियान्वयन कराया जाए जिससे प्रत्येक किसान को योजना का लाभ मिल सके। 
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कृषि अनुसंधान केंद्र खुलवाया जाए
किसान हाकिम सिंह का कहन है कि बुंदेलखंड का इलाका कृषि के क्षेत्र में अत्यधिक पिछड़ा हुआ है। यहां का किसान आज भी परंपरागत खेती पर निर्भर है। जानकारी के अभाव में अपनी फसल की सही उपज नसीब नहीं हो पा रही है, यही कारण है कि किसान लगातार पिछड़ रहा है। ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो किसानों की आवश्यकताओं को समझे और उनके विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कराए। साथ ही जनपद में कृषि अनुसंधान केन्द्र की महती आवश्यकता है जिससे किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी मिल सके। 
समस्याओं को उठाने वाले नेता की जरूरत
किसान बालचंद ने कहा कि जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो किसानों का मर्म समझे। ईमानदारी से किसानों की आवाज विधानसभा में बुलंद करे, ताकि इस क्षेत्र के किसानों की समस्याओं का समाधान हो और खुशहाल व समृद्ध बनकर प्रदेश के विकास में सहायक बन सकें।
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अव्यवस्थाओं का शिकार हैं किसान
किसान चुन्नीलाल कहते हैं कि जनपद का किसान प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ तमाम अव्यवस्थाओं का भी शिकार है। कुछ वर्षों से पड़ी प्राकृतिक आपदाओं से परेशान किसान आज भी उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उन्हें विभागों में फैले भ्रष्टाचार से होकर गुजरना पड़ रहा है। यह विडंबना है कि जनपद में बांधों की भरमार होने के बाद भी किसान खेतों की सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं। आज भी जिले के सैकड़ों गांव के खेत पानी के अभाव में खाली ही पड़े रहते हैं। वह चुनाव के समय ऐसे प्रत्याशी को ही प्राथमिकता देंगे जो भ्रष्टाचार को समाप्त करके किसानों समस्याओं को उठाने वाला और ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने वाला हो। 
कृषि के स्तर में सुधार की आवश्यकता 
सुखपाल सिंह ने कहा कि किसान अन्नदाता हैं। यदि वह सुखी रहेगा तो देश भी खुशहाल होगा।  देश की 70 फीसदी आबादी गांव में निवास करती है। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है, इसलिए कृषि के स्तर में सुधार के लिए ठोस पहल किए जाने की आवश्यकता है। 
पंचायत स्तर पर हों किसानों की जरूरतें पूरी
सुंदरलाल कुशवाहा का मानना है कि खेती किसानी से संबंधित सभी चीजें जैसे खाद, बीज, उपज के रखरखाव के लिए वेयरहाउस, बैंक, उपज खरीद केन्द्र आदि की व्यवस्था यदि पंचायत स्तर पर हो जाए तो किसानों को इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा और उसकी आवश्यकताएं समय से पूरी हो जाएंगी। साथ ही उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में भी सुधार पर जोर दिया। 
ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का हो बेहतर माहौल तैयार
किसान हसरत अली ने भी शिक्षा व सड़क के विकास पर जोर दिया। वह चाहते हैं कि जनप्रतिनिधियों का प्रयास विद्यालय निर्माण अथवा सड़क निर्माण तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि विद्यालय के अंदर शिक्षा का बेहतर माहौल तैयार कराया जाए, जिससे ग्रामीणों के बच्चों की गुणवत्ता पर शिक्षा मुहैया हो और वह शिक्षित होकर गांव व समाज का भला कर सकें। 
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