ललितपुर। शहर की ले-आउट प्लान व मानचित्र स्वीकृत प्राइवेट कालोनियों के विकास की ओर नियत प्राधिकरण का ध्यान नहीं है, जबकि अवैध कालोनियों को वैध कराने की मुहिम चालू कर दी गई है। स्थिति यह है कि शहर में 18 प्राइवेट कालोनी ऐसी हैं, जिनके विकास के नाम पर प्राधिकरण ने कालोनियों की जमीन को बंधक बनाया, जबकि इनके विकास की ओर कोई ध्यान नहीं है।
विनियमित क्षेत्र प्राधिकरण सीमा के भीतर शहर की 18 प्राइवेट कालोनी ऐसी हैं, जिनका प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत हैं। इन कालोनियों में से दो-तीन कालोनियों को छोड़कर किसी भी कालोनी का विकास नहीं किया गया है। मानचित्र स्वीकृत होने के बाद प्राधिकरण उक्त कालोनी की करीब दस प्रतिशत भूमि को इस उद्देश्य से बंधक बना लिया गया कि यदि कालोनी मालिक द्वारा कालोनी में सड़क व नाली बनाकर विकास नहीं किया गया तो कालोनी में रहने वाली जनता के हित में प्राधिकरण तय समय सीमा के बाद बंधक बनी भूमि को बेचकर कालोनी का विकास कराएगा।
शासनादेश के अनुसार यदि पांच वर्षों तक कालोनी मालिक कालोनी का विकास नहीं कराता है, तो इसके बाद प्राधिकरण बंधक बनी भूमि को खुली नीलामी में बेचकर मिले रुपयों से कालोनी में सड़क, नाली निर्माण व अन्य विकास कार्य करता है।
लेकिन, वर्षों बीतने के बाद अभी तक प्राधिकरण द्वारा एक भी कालोनी का विकास नहीं कराया गया है। विकास की बाट जोह रही वैध कालोनियों को नजरअंदाज कर विभाग अवैध कालोनियों को वैध करने की तैयारियों में जुटा हुआ है।
प्राधिकरण उदासीन व जनता खामोश
नियत प्राधिकरण के पास शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 16 कालोनियों के विकास के नाम पर भूमि बंधक बनी हुई है। इनमें से सात कालोनियां ऐसी हैं, जिनको आठ वर्ष से भी अधिक का समय बीत गया है, लेकिन न तो अभी तक कालोनी मालिक द्वारा और न ही प्राधिकरण द्वारा कालोनियों का विकास कराया गया है। प्राधिकरण की उदासीनता के अलावा उक्त कालोनियों में रहने वाले लोग भी इसके जिम्मेदार हैं,
क्योकि इतने वर्षों में किसी भी कालोनीवासी द्वारा प्राधिकरण से कालोनी के विकास की मांग नहीं की गई है। इसके पीछे लोगों में जानकारी का अभाव मुख्य करण है। प्राधिकरण के अधिकारियों को अभी यह भी पता नहीं है कि कालोनियों की जो भूमि विकास के नाम पर बंधक बनी हुई है, वह सुरक्षित भी है या नहीं। ऐसी कई भूमि हैं, जिन पर कब्जा कर लिया गया है या फिर कालोनी मालिक द्वारा उक्त भूमि को गुपचुप तरीके से बेच दिया गया है।
वोट बैंक की खातिर नियम विरुद्ध कराए कार्य
प्राधिकरण के नियमों के अनुसार प्राइवेट कालोनी में सड़क, नाली निर्माण व अन्य विकास कार्य कराने की जिम्मेदारी कालोनी मालिक की होती है। यदि कालोनी मालिक पांच वर्षों तक विकास नहीं कराता है तो इसके बाद आठ वर्ष के भीतर प्राधिकरण बंधक बनी भूमि को बेचकर कालोनी का विकास कार्य कराता है। कालोनी में विकास के बाद उसे नगर पालिका को हस्तांतरित कर दिया जाता है, ताकि भविष्य में कालोनी की देखरेख नगर पालिका द्वारा की जाती रहे, क्योंकि कालोनी में रहने वाले लोग अन्य नागरिकों की तरह नगर पालिका को सभी तरह के शुल्क अदा करने पड़ते हैं।
लेकिन, नगर पालिका के जिम्मेदारों ने अपना वोट बैंक बनाने की मंशा से नियमों के विरुद्ध कालोनियों में सड़क व नाली का निर्माण करा दिया। जनहित में तो यह सही है, पर शासन के नियमों के अनुसार यह अवैधानिक है। प्राइवेट कालोनियों में नगर पालिका द्वारा विकास करा देने के बाद प्राधिकरण में बंधक बनी भूमि का क्या होगा, यह भी एक विचार करने का मामला है।
इन वैध कालोनियों की भूमि है बंधक
शहर में कुल 18 प्राइवेट कालोनियां प्राधिकरण से स्वीकृत हैं। इसमें से दो कालोनी बाहुबलि नगर और एंब्रोसिया प्रथम को छोड़कर अन्य 16 कालोनियों की कुछ भूमि प्राधिकरण के पास बंधक बनी है। इन कालोनी में विदुआ कालोनी, नवजीवन प्रथम व द्वितीय, हरदीला, सिद्धनपुरा खुमान कालोनी, पार्श्वनाथ कालोनी, हेरीटेज कालोनी आजादपुरा, एंब्रोसिया द्वितीय, गोकुल धाम रावतयाना, राधेकृष्ण कालोनी प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ, सदन बिहार, सदन नगर व टीचर्स कालोनी पिसनारी हैं।
प्राधिकरण द्वारा कालोनी के जो प्लाट बंधक बनाए गए हैं, उन कालोनी के मालिकों को कालोनी के विकास के लिए नोटिस भेजा जाएगा। यदि उनके द्वारा विकास नहीं कराया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करी जाएगी और प्लाटों को नीलाम कर कालोनी का विकास कराया जाएगा।
- रमेश चंद्र, एसडीएम/नियत प्राधिकारी