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मृतक एक, जन्मतिथियां दो, पकड़ी गई कारस्तानी

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police - फोटो : police
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तालबेहट। जिनके ऊपर सरकार की योजनाओं को सही तरीके से क्रियान्वयन कराने का जिम्मा है, वही लोग इन योजनाओं से खिलवाड़ करने लगे हैं। मृतक किसान की दो अलग- अलग जन्मतिथियां सामने आई हैं। ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आने पर तहसीलदार सौरभ कुमार पांडेय ने दोषी ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा है।
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जिलाधिकारी को भेजे पत्र में तहसीलदार ने बताया कि मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत मृतक दमरु पुत्र देवी निवासी करीला ग्राम पंचायत खांदी विकासखंड तालबेहट की पत्नी शिंबू ने इस योजना के लाभ के लिए अपना दावा किया था। परीक्षण करने पर पाया गया कि ग्राम विकास अधिकारी ग्राम पंचायत खांदी ने मृतक दमरु पुत्र देवी कुशवाहा की मृत्यु के उपरांत परिवार रजिस्टर की नकल मकान क्रमांक 852 दिनांक 19 सितंबर 20 तथा 05 अगस्त 20 को जारी की गई है। इसमें ग्राम विकास अधिकारी प्रदीप नारायण त्रिपाठी द्वारा मृतक दमरु की मृत्यु 19 जुलाई 20 अंकित की गई है, लेकिन जन्मतिथि क्रमश: एक जनवरी 1959 तथा एक जनवरी 1942 अंकित की गई है। मृतक की जन्म तिथि में भिन्नता पाए जाने के कारण उसे पुन: सत्यापन के लिए खंड विकास अधिकारी तालबेहट को पत्र भेजा गया था।
इसके बाद सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण तालबेहट द्वारा बिना तिथि अंकित किए ग्राम पंचायत अधिकारी के साथ संयुक्त हस्ताक्षर से रिपोर्ट प्रेषित की गई। खंड विकास अधिकारी द्वारा छह अक्तूबर को जांच आख्या में बताया गया कि ग्राम विकास अधिकारी प्रदीप नारायण त्रिपाठी ने अवगत कराया है कि उनके द्वारा न तो कोई परिवार रजिस्टर की नकल जारी की गई और न ही कोई आवेदन प्राप्त हुआ था। इस प्रकार खंड विकास अधिकारी व ग्राम विकास अधिकारी की आख्या परस्पर विरोधाभासी है।
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वहीं, खंड विकास अधिकारी के उक्त पत्र में मृतक दमरु की जन्मतिथि एक जनवरी 1942 बताई है, जिससे मृतक की उम्र सत्तर वर्ष से अधिक आती है। इस कारण उसके वारिस कृषक दुर्घटना योजना का लाभ पाने के पात्र नहीं हैं। ग्राम विकास अधिकारी ने अपने स्पष्टीकरण में पांच अगस्त को जारी परिवार रजिस्टर की नकल को अपने द्वारा जारी होना बताया, जबकि 19 सितंबर 2020 को जारी नकल को अपने द्वारा जारी नहीं होना बताया। लेकिन, उनके द्वारा जारी दोनों नकलों की राइटिंग एवं प्रविष्टियों में पर्याप्त समानता है।
इस प्रकार ग्राम विकास अधिकारी प्रदीप नारायण त्रिपाठी द्वारा न केवल अलग- अलग हस्ताक्षर से दो नकलें जारी की गईं, अपितु अपने पर्यवेक्षकीय अधिकारी सहायक विकास अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी को भी गुमराह करके 70 वर्ष से अधिक उम्र के मृतक दमरु पुत्र देवी की मृत्यु के उपरांत उनकी वारिस पत्नी शिम्बू को अपात्र होने के बावजूद अनुचित लाभ दिलाने का प्रयास किया गया। यह अत्यंत गंभीर है तथा राजकीय सेवक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराए जाने से संबंधित है।
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ग्राम विकास अधिकारी का यह कार्य पूरी तरह गलत है। जो राजकीय कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों एवं भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन है।
- सौरभ कुमार पांडेय, तहसीलदार तालबेहट।
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- अभी उक्त मामले की जांच चल रही है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- आलोक कुमार, खंड विकास अधिकारी तालबेहट
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