संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद के जंगलों में जैव विविधता बड़ाना स्वस्थ्य जंगल की निशानी माना जाता है, जैव विविधता बड़ने के बाद यहां पर शिकारियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। वन विभाग जंगली जानवरों की सुरक्षा का दावा तो करता है, लेकिन उनका दावा वहां फैल हो जाता है, जहां वह संरक्षित प्रजाति के पशुओं को भी नहीं बचा पाता है। इसकी परिणाम है, कि आज शिकारियों के फंदे में फंसकर एक और तेंदुआ की जान चली गई।
जिले को वन विभाग ने 09 रेंजों विभाजित किया गया, यह रेंज तालबेहट, माताटीला, जखौरा, ललितपुर, बार, महरौनी, मड़ावरा, मदनपुर व गौना रेंज में विभाजित किया गया है। ललितपुर, गौना, मड़ावरा व मदनपुर में जैव विविधता की भरमार है, यहां पर बाघ, तेंदुआ, लकड़बग्गा, भालू, हिरन, बारासिंघा, जंगली सूअर, खरगोश, चितल आदि जानवर शामिल हैं। इन जानवरों की वन विभाग सुरक्षा के दावे तो कर रहा है, लेकिन फिर भी शिकारी सक्रिय दिखाई देते हैं, नौ फरवरी को गौना रेंज अंतर्गत महौली के बाद अब यह हादसा होना, वन विभाग की निष्क्रयता दिखाई पड़ती है। क्योंकि दोनों प्रकरण में हिरन आदि जानवरों को शिकार बनाने के नियत से लगाए गए, फंदों में तेंदुआ की मौत हुई है।