संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। एलयूसीसी प्रकरण में अपर सत्र न्यायाधीश (बड्स एक्ट 2019) यादवेंद्र सिंह की अदालत ने बृहस्पतिवार को एलयूसीसी के खिलाफ दर्ज मामले में अनियमित जमा योजना प्रतिबंध (बड्स) अधिनियम की धारा 3/21को प्रसंज्ञान लेने से इन्कार कर दिया है। अदालत ने विवेचक को आरोप पत्र वापस करने के आदेश देते हुए इस नियमत: सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। एलयूसीसी घोटाले से संबंधित मामले में कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप था कि एलयूसीसी द्वारा निवेशकों से अवैध तरीके से धन एकत्र किया गया। विवेचक ने आरोप पत्र भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ बड्स एक्ट की धारा 3/21 के तहत न्यायालय में प्रस्तुत किया। बृहस्पतिवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एलयूसीसी एक पंजीकृत बहु-राज्य सहकारी समिति है, जो कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के अंतर्गत भारत सरकार के केंद्रीय रजिस्ट्रार से पंजीकृत है। न्यायालय ने यह माना कि सोसाइटी द्वारा चलाई जा रही स्कीम रेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम की श्रेणी में आती है, न कि अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम की श्रेणी में। इसलिए बड्स अधिनियम की धारा 4/22 के प्रावधान इस मामले पर लागू होंगे, न कि धारा 3/21 के प्रावधान, जो जोड़े गए हैं।
न्यायालय ने निर्देश दिए कहा कि धारा 4/22 से जुड़े मामलों में केवल रेगुलेटर द्वारा योजित परिवाद के आधार पर ही संज्ञान लिया जा सकता है (धारा 27)। इसलिए वर्तमान में आरोपियों के विरुद्ध बड्स एक्ट की धारा 3/21 के अंतर्गत प्रसंज्ञान नहीं लिया जा सकता। इस आधार पर न्यायालय ने केस डायरी और आरोप पत्र वापस विवेचक को इस निर्देश के साथ लौटाने का आदेश दिया कि वे इसे सक्षम न्यायालय में नियमानुसार प्रस्तुत करें।