फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lalitpur News: एक माह से पेशाब न आने के कारण असहनीय पीड़ा से तड़प रहा बालक

विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

सिलावन (ललितपुर)। साहब, भले ही मेरी साइकिल गिरवीं रख लो पर बच्चे के इलाज के लिए कुछ रुपया दे दो, नहीं तो तड़प-तड़प कर इसकी जान निकल जाएगी। यह शब्द उस बेबस पिता के हैं जो दर्द से कराह रहे अपने पांच वर्षीय पुत्र का धनाभाव के कारण इलाज नहीं करा पा रहा है। जब पुत्र को असहनीय पीड़ा हुई तो उसे अपनी साइकिल गिरवीं रख इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। वह मदद की आस में अपने एक रिश्तेदार के यहां आया। बालक को तड़पता देख कुछ युवाओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी में भर्ती कराया।
विकास खंड बार अंतर्गत मोगान गांव निवासी प्रागी सहरिया की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। पत्नी लंबे अरसे से लापता है। प्रागी बताता है कि वह आंशिक रूप से दिव्यांग है। जैसे तैसे चार बच्चों का लालन पालन कर रहा है। विगत एक माह से उसका पांच वर्षीय पुत्र शंकर पेशाब न आने की समस्या से जूझ रहा है। इससे उसके पेट में काफी दर्द रहने लगा। धनाभाव के कारण वह अस्पताल जाकर इलाज नहीं करा सका और यहां वहां झाड़फूंक करवाता रहा। बृहस्पतिवार को असहनीय पीड़ा होने पर वह अपने रिश्तेदार के यहां साइकिल गिरवीं रखकर इलाज के लिए बांसी जाने को तैयार हुआ। उसकी मजबूरी देख यहां के धनीराम वर्मा, अध्यापक सुरेंद्र दुबे, हेमंत भौडेले, अभिषेक वाजपेयी उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी ले गए। वहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार की एक भी योजना का नहीं मिला लाभ
प्रागी सहरिया बताता है कि उसे न तो मनरेगा में काम मिलता है न ही आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा का कार्ड बना है। आवासीय योजना की पात्रता में भी नहीं रखा गया है, जिसके चलते वह गांव में बरसाती डालकर रहने को मजबूर है। इतना ही नहीं उसने राशन भी नहीं मिलने की बात कही। विडंबना तो यह है कि सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े लोगों तक जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का बढ़चढ़ कर दावा करती है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें