ललितपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लागू होते ही ग्यारह हजार एपीएल कार्डों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो गया है। सैकड़ों लोग अपने कार्ड लेकर उचित दर की दुकानों से लेकर कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन, उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे लोगों की परेशानी कम होने की जगह बढ़ गई हैं।
सूखे की विभीषिका से जूझ रहे जिले के लोगों के सामने रोटी के जुगाड़ का संकट गहराने लगा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लागू हुई तो गरीबों के चेहरों पर अजीब सी चमक दिखाई देने लगी थी। इस माह से दो रुपए किलो गेहूं और तीन रुपए किलो चावल का वितरण शुरू होने लगा तो तमाम गड़बड़ियां उजागर हो गई हैं। चयनित सूची में दर्जनों की संख्या में अपात्र शामिल हो गए हैं।
कई शिक्षक व सरकारी कर्मचारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे में आ गए हैं, वहीं बहुत से निर्धन नाम जुड़वाने के लिए सरकारी कार्यालयों में चप्पलें घिसते दिखाई दे रहे हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति भारी असंतोष देखा जा रहा है।
पूर्ति निरीक्षक अशोक कुमार का कहना है कि शहर में योजनांतर्गत साढ़े दस हजार आनलाइन आवेदन हुए हैं।
अंत्योदय के 2,444 कार्डधारक हैं, जो अस्तित्व में हैं। पहले 11 हजार एपीएल कार्डधारक थे, जो अब अस्तित्व में नहीं रहे। शासन ने बीपीएल व अंत्योदय कार्डधारकों को ही योजना में शामिल करने को कहा था।
क्या होगा एपीएल गरीब का?
जिला पूर्ति विभाग अभी तक एपीएल कार्डधारकों को अनाज मुहैया कराता था। विभागीय अफसरों का मानना था कि बहुत से लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने के बाद भी योजना में शामिल नहीं हो सके। उचित दर विक्रेता जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर ऐसे एपीएल कार्डधारकों को अनाज देते थे। लेकिन, अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना में सभी एपीएल कार्डधारक बाहर हो गए हैं। ऐसे में उनके भविष्य का संकट मंडराने लगा है।
सर्वे पर उठे सवाल
पूर्ति विभाग के अफसरों का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना की पात्रता सुनिश्चित करने के लिए सर्वे कराया गया है। लेकिन, चयनित सूची में अपात्रों के नाम शामिल होने पर अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तविक सर्वे हुआ है तो इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी कैसे हो गई?
मुहल्लों के लोग भटक रहे
ललितपुर शहर की पुरानी बस्तियों में मुहल्ला चौबयाना, सरदारपुरा व महावीर पुरा का नाम आता है। यहां धनाढ्य वर्ग के साथ गरीब लोगों की संख्या अच्छी खासी है, इसके बाद भी विभाग ने तमाम गरीबों की अनदेखी कर दी है।