ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों की वार्षिक परीक्षा पर करीब 23 लाख रुपये व्यय होंगे। इस राशि से प्रश्न पत्रों का मुद्रण और उत्तरपुस्तिकाओं का क्रय किया जाएगा। शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने बीएसए को पत्र लिखकर परीक्षा आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से परिषदीय विद्यालयों में सभी तरह के शुल्क लेने पर रोक लगाई गई है। इसका नतीजा यह हुआ कि परीक्षा के लिए धन की कमी पड़ने लगी और धनाभाव में परीक्षाएं होती रही। पिछले साल तक बच्चों को परीक्षाओं में उत्तरपुस्तिकाएं घर से लानी पड़ती थीं।
यही नहीं, प्रश्न पत्र ब्लेक बोर्ड पर उतार दिए जाते थे। ऐसे में परीक्षाओं के नाम पर महज औपचारिकता हो रही थी, जिससे परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने की मंशा पर पानी फिर रहा था।
इसे संज्ञान में लेकर शिक्षा निदेशक (बेसिक) दिनेश बाबू शर्मा ने वार्षिक परीक्षा को विधिवत संचालित कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने परीक्षा मद में 23,17,510 लाख रुपए की धनराशि अवमुक्त कर दी है। इस राशि से प्रश्न पत्रों का मुद्रण व उत्तर पुस्तिकाओं का क्रय किया जाएगा।
कक्षा दो से पांच तक छात्र व छात्राओं की वार्षिक परीक्षा में प्रति छात्र दस रुपए खर्च किए जाएंगे, जबकि कक्षा छह से आठ तक के छात्र व छात्राओं की वार्षिक परीक्षा में प्रति छात्र बीस रुपए के हिसाब से धनराशि व्यय की जाएगी। कक्षा एक के छात्र व छात्राओं की केवल मौखिक परीक्षा होगी।
चालू वित्तीय वर्ष की वार्षिक परीक्षाएं 14 से 21 मार्च के मध्य आयोजित की जाएंगी। इसके मद्देनजर विभागीय अफसरों ने परीक्षा की तैयारी आरंभ कर दी है।
परीक्षा में इतने बैठेंगे छात्र
परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 1.98 लाख छात्र व छात्राएं परीक्षा में शामिल होंगे। विभागीय कर्मियों का कहना है कि मॉडल पेपर को ध्यान में रखकर प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे।