संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। अब राजस्व विभाग आपदा मोचक योजना में छूटे किसानों का डाटा एकत्रित करने में जुटा है। वित्तीय वर्ष 2021-22, 2022-23 में कुछ किसानों के खाता, आधार व डुप्लीकेसी के कारण उन्हें अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से क्षति का मुआवजा नहीं दिया जा सका था। सरकार ने ऐसे किसानों की सूची मांगी है। तहसील स्तर पर सभी उपजिलाधिकारी व तहसीलदार इस कार्य में जुट गए हैं। वर्तमान में प्रशासन के पास कोई प्रमाणित डाटा नहीं है।
शासन ने दैवीय आपदा से प्रभावित फसलों के मुआवजा से छूटे किसानों का डाटा मांगा था। जब इन किसानों की सूची तलाशी गई तो प्रशासन को अपने हाथ खाली दिखाई दिए, जबकि पोर्टल पर वंचित किसानों की सूचना स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अब प्रशासन अपनी कमी छुपाने के लिए सभी तहसीलों में सर्वे कराने का दावा कर रहा है, जबकि किसान निरंतर अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से नुकसान फसलों के मुआवजे की मांग करते आए हैं।
वित्तीय वर्ष 2021-22 व 2022-23 में अधिकांश किसानों की फसलें बर्बाद हो गई थीं। शासन ने इन्हें राहत देने की घोषणा की थी और धनराशि भी पहुंचाई थी। जो डाटा आपदा राहत के लिए शासन को भेजा गया था, उसमें कुछ किसानों के खाते गलत थे, तो कई किसानों की आधार संख्या गलत दर्ज कर दी थी। उस सूची में एक किसान का कई बार नाम भी चला गया था। ऐसे किसानों के खातों में रुपया नहीं आया। शासन ने इन किसानों का डाटा दुरुस्त करने के लिए आदेशित किया था। लेकिन, जिला प्रशासन स्तर के अधिकारियों ने इस डाटा को दुरुस्त करने में रुचि नहीं दिखाई। हाल में शासन ने इस पूरे प्रकरण में लंबित किसानों की सूची तलब कर ली। अब इन किसानों का डाटा खंगाला जा रहा है।
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तहसील स्तर पर ऐसे किसानों का डाटा तैयार करने के लिए उपजिलाधिकारी व तहसीलदारों को लगा दिया है। जल्द किसानों डाटा तैयार हो जाएगा, इसके बाद मुआवजा से वंचित किसानों की संख्या दी जा सकेगी।
अंकुर श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।