ललितपुर। पोषण मिशन का जिम्मा उठा रहे अफसरों को एक और नई जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। अब पोषण मिशन के साथ- साथ उन्हें आवंटित 232 विद्यालयों को आदर्श बनाना होगा। डीएम ने पोषण मिशन का कार्य देख रहे अफसरों को विद्यालय गोद लेने के निर्देश दिए हैं।
बुंदेलखंड का अति पिछड़ा जिला ललितपुर कुपोषण की समस्या से जूझ रहा है। इसके मद्देनजर पोषण मिशन की लगातार मानीटरिंग हो रही है। शासन के निर्देश पर विभिन्न विभागों के अफसरों को आंगनबाड़ी केंद्र आवंटित किए गए हैं। नामित अफसरों को हर माह इन आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित हो रहे पोषाहार वितरण का निरीक्षण करना होता है।
जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने पोषण मिशन को सफल बनाने में लगे अफसरों को दो- दो स्कूल भी आवंटित कर दिए हैं। इस तरह नामित अफसरों को आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ- साथ विद्यालय की व्यवस्थाओं पर भी नजर रखनी होगी।
क्या पूर्व अनुभव से लेेंगे सबक?
परिषदीय शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए लाख प्रयास हो रहे हैं। गोद लेने की परंपरा कोई नई नहीं है। इससे पहले भी विद्यालयों को गोद लिया जाता रहा है। अधिकारी विद्यालयों को गोद तो ले लेते हैं, लेकिन फिर पीछे मुड़कर नहीं देखते। गत शैक्षिक सत्र में खंड शिक्षा अधिकारियों, सह समन्वयकों ने दो-दो विद्यालयों को गोद लिया था।
अधिकतर खंड शिक्षा अधिकारी व सह समन्वयकों ने आवंटित विद्यालयों की शैक्षिक व्यवस्था की सुध नहीं ली। वर्तमान में भी सह समन्वयकों को विद्यालय आवंटित हैं। बीएसए की छापेमारी में कड़वी सच्चाई उजागर हो रही है।
शायद बदले विद्यालयों के हालात
डीएम की पहल पर जिन अधिकारियों को विद्यालय आवंटित हुए हैं, शायद उन विद्यालयों की दशा सुधर जाए। आवंटित विद्यालय आदर्श बन पाते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिक गई हैं।