ललितपुर। दस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैली रॉक फास्फेट की बंद पड़ी खदान चालू होने से करीब चार हजार मजदूरों को रोजगार मिलेगा। बीते पंद्रह वर्ष से यह खदानें बंद पड़ीं हैं। अपने घर लौटे प्रवासी मजदूरों के लिए जिले में खनिज संपदा के माध्यम से रोजगार बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। ग्रेनाइट की खदानें खोलने के बाद अब रॉक फास्फेट के खनन को मंजूरी दिलाने के लिए प्रशासन जुट गया है। डीएम ने वन विभाग को दस दिन में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, केंद्र सरकार से अनुमति पाने के लिए पत्राचार शुरू कर दिया गया है।
जिले में अकूत खनिज संपदा है। इससे शासन का राजस्व बढ़ाने और लोगों को रोजगार मुहैया कराए जाने के लिए खनन पट्टे देने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार को रॉक फास्फेट के खनन में आ रहीं आपत्तियों के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने डीएफओ से दस दिन में एनओसी मांगी है, साथ ही जमीन के स्थानांतरण की आवश्यकता होने पर तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। बुंदेलखंड में सबसे पिछड़ा जिला ललितपुर माना जाता है। यहां पर भारी मात्रा में खनिज संपदा है, जहां ग्रेनाइट, इमारती पत्थर, सेंड स्टोन, बालू, रॉक फॉस्फेट व प्लेटिनम का भंडार पाया जाता है। हालांकि, वर्तमान में कई प्रकार के खनिज संपदाओं के पट्टे चल रहे हैं, जिससे जनपद के दस हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, तो वहीं शासन को भारी मात्रा में राजस्व मिल रहा है।
जिले में बीते लगभग 20 वर्षों से ठप पड़ेे तहसील मडावरा के ग्राम सौरई के पास स्थित ग्राम सेमरखेड़ा, पिसनारी के पास के गांव में रॉक फॉस्फेट के कारोबार को शुरु करने के लिए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तैयारी शुरु कर दी है। यहां पर बीते वर्षों पहले रॉक फॉस्फेट की खदानों पर खनन कार्य चलता था, लेकिन पट्टा अवधि समाप्त होने के बाद वन विभाग द्वारा खनन कार्य पर आपत्ति लगाई गई है। तब से खनन कार्य पूरी तरह से बंद चल रहा था। लेकिन, बीते दिनों आई खनिज निदेशालय की टीम ने बंद पड़े रॉक फॉस्फेट के खनन को नई उम्मीद जगा दी है। टीम ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर मामलों की जानकारी ली। इसके बाद निस्तारण करने की तैयारी कर रहे हैं।
शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में वन विभाग की आपत्ति को लेकर रॉक फॉस्फेट के कारोबार में लगी रोक पर जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने डीएफओ से संबंधित मामलों में दस दिन में एनओसी मांगी है। उन्होंने कहा कि दस दिन में रॉक फॉस्फेट के मामले में एनओसी दिलाएं और इस दौरान यदि जमीन स्थानांतरण करने की आवश्यकता होने पर स्थानांतरण की तैयारी की जाए, जिससे रॉक फॉस्फेट के कारोबार को बढ़ाया जा सके। तहसील मड़ावरा के ग्राम सौंरई के आसपास के गांव में रॉक फॉस्फेट पाया जाता है। वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद शासन के नियमों की प्रक्रिया का पालन करते हुए विस्थापन की कार्रवाई की जाएगी।
रॉक फॉस्फेट का यह है उपयोग
रॉक फॉस्फेट का उपयोग खाद बनाने में किया जाता है। इसके अलावा जंग रोधी लेप व सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं के निर्माण में भी किया जाता है।
रॉक फॉस्फेट के मामले में वन विभाग से दस दिन में एनओसी दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जमीन स्थानांतरण की आवश्यकता में तैयारी करने के लिए कह दिया गया है। इसके बाद सेंपलिंग कराई जाएगी। केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद खनन की तैयारी की जाएगी। - योगेश कुमार शुक्ल जिलाधिकारी