नवीन शिक्षकों की खेप तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान का बुरा हाल है। संस्थान में शिक्षक कर्मचारियों के कुल 48 पद हैं, इनमें से सिर्फ एक दर्जन पद ही भरे हैं, शेष 36 पद वर्षोँ से खाली चल रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो वरिष्ठ प्रवक्ता के स्वीकृत 6 में से सिर्फ दो पद ही भरे हुए हैं। वहीं, प्रवक्ता के स्वीकृत 17 पद में से महज एक पद भरा है। प्रयोगशाला सहायक का भी पद रिक्त हैं। वर्तमान में बीटीसी वर्ष 2013 बैच की कक्षाएं संचालित हैं। इसके अलावा प्रशिक्षु शिक्षकों की भी ट्रेनिंग शुरू हो गई है। पिछले महीनों में बीटीसी कक्षाएं सुचारु चलाने के लिए कुछ सह समन्वयकों को संबद्ध किया गया था, जबसे प्रशिक्षु शिक्षकों के बैच बीआरसी स्तर पर शुरू हुए हैं, तब से सह समन्वयकों की भी व्यस्तता अचानक बढ़ गई है। इस स्थिति में डायट में संचालित प्रशिक्षणों का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके बाद भी शासन मौन बना हुआ है।