अब प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक भी कहानी सुनाने में पारंगत होंगे। इसके लिए पहली बार कहानी सुनाने की प्रतियोगिता कराई जा रही है। प्रतियोगिता दो चरणों में होगी और चयनित शिक्षकों की वीडियो एससीईआरटी की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे।
एससीईआरटी की ओर से कहानी सुनाने की प्रतियोगिता होने जा रही है। इससे स्कूलों में भी शिक्षक बच्चों को कहानियों के सहारे ही नैतिक, मानवीय और संस्कार व आचरण की शिक्षा दी जाएगी। प्रतियोगिता के संबंध में राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक डॉ. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने समस्त डायट प्राचार्यों व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को बीते 12 अक्टूबर को पत्र जारी करके आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए हैं। यह प्रतियोगिता दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में डायट प्राचार्य खंड शिक्षाधिकारियों से 31 अक्तूबर तक इच्छुक शिक्षकों के नाम लेंगे।
इन नामित शिक्षकों की कहानियों को सुनकर कहानी की विषयवस्तु, भाषा, सुनाने के तरीके के आधार पर स्क्रीनिंग की जाएगी और अधिकतम 10 शिक्षकों का चयन 10 नवंबर तक किया जाएगा। स्क्रीनिंग में चयनित शिक्षकों को कहानी सुनाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। जिला स्तर पर अंतिम चयन के लिए डायट की ओर से तीन सदस्यों का पैनल नामित किया जाएगा और चयनित शिक्षकों के नाम 17 नवंबर तक एससीईआरटी को उपलब्ध कराना हैं। कहानी का वीडियो, मोबाइल या कैमरे से बनाया जा सकता है। वहीं, दूसरे चरण में डायट से नामित शिक्षकों को नवंबर के अंतिम सप्ताह में एससीईआरटी लखनऊ आमंत्रित किया जाएगा। संबंधित शिक्षकों को अपनी कहानी सुनाने के कौशल का प्रदर्शन करना होगा। इसका मूल्यांकन चयन समिति करेगी। प्रत्येक मंडल से दो-दो श्रेष्ठ शिक्षकों को चुना जाएगा और पुरस्कृत किया जाएगा।
तीन से पांच मिनट की होगी कहानी
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले शिक्षकों को तीन से पांच मिनट के बीच तक की कहानी सुनानी होगी। कहानी मनोरंजक, शिक्षाप्रद, परिवेश से जुड़ी हों, आरंभिक शिक्षा के बच्चों के स्तर की हो, कहानी की भाषा सरल और सभ्य हो। कहानी को सुनाने का तरीका रोचक और प्रभावी हो, जिससे बच्चे कहानी को समझ सकें और उस पर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर दे सकें और प्रश्न भी पूछ सकें।
इनका कहना है
परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों की कहानी सुनाने की प्रतियोगिता कराने के संबंध में शासन से आदेश प्राप्त हुआ है। जल्द ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों से बैठक करके प्रतियोगिता का आयोजन कराया जाएगा। साथ ही आगामी दिनों में परिषदीय विद्यालयों की अर्द्धवार्षिक परीक्षा शुरू होने वाली है, इसका भी ध्यान रखा जाएगा।
- जेपी राजपूत
प्राचार्य, डायट ललितपुर।