सिलावन(ललितपुर)। शिक्षकों की मनमानी बच्चों की शिक्षा पर भारी पड़ रही है। स्थिति यह है कि शिक्षकों का न तो विद्यालय आने का कोई समय है और न ही जाने का। नतीजतन बच्चे खेलकूद कर घर चले जा रहे हैं या फिर शिक्षकों के इंतजार में खुद ही पढ़ने- पढ़ाने लगते हैं।
बुधवार को ऐसा ही एक नजारा विकासखंड महरौनी के डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम अजान के प्राथमिक विद्यालय में देखने को मिला।
डॉ. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्रामों का विकास कराना शासन की प्राथमिकता में शामिल है। इसी के तहत गांवों में प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. रूपेश कुमार ने भी शिक्षा की बदहाली को देखते हुए निर्णय लिया था कि वह स्वयं विद्यालय के बच्चों की पाठशाला लगाएंगे और बच्चों के कमजोर विषयों को गंभीरता से लेंगे। लेकिन, लगता है कि डॉ. लोहिया गांवों में शिक्षा की ओर प्राथमिक विद्यालय के अध्यापकों का कतई ध्यान नहीं है।
बुधवार की सुबह दस बजे तक ग्राम अजान के प्राथमिक विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं पहुंचा था। बच्चे शिक्षकों के इंतजार में बरामदे में खड़े थे। थोड़ी देर बाद विद्यालय में तैनात रसोइया ने विद्यालय के एक कक्ष का ताला खोलकर नौनिहालों को उसमें बैठा दिया। शिक्षकों का इंतजार करते हुए छात्र ने स्वयं ब्लैक बोर्ड के पास जाकर अन्य छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया।
इस विद्यालय में दो शिक्षक व दो शिक्षिकाएं तैनात हैं। इतना ही नहीं आंगनबाड़ी केंद्र के ताले भी नहीं खोले गए थे। प्राथमिक विद्यालय ग्राम अजान तो बानगी मात्र है, विकासखंड के अनेक विद्यालयों में ऐसे नजारे आम हैं। शिक्षक-शिक्षिकाएं अपने निजी कार्यों के कारण या तो विद्यालय देरी से पहुंचते हैं या फिर पहुंचते ही नहीं हैं। ऐसी स्थिति में शिक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च करने वाली सरकार के मंसूबों पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
प्राथमिक विद्यालय अजान में तैनात शिक्षक अवकाश पर नहीं हैं। यदि वह विद्यालय नहीं पहुंचे रहे हैं तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- राजकुमार पुरोहित
खंड शिक्षा अधिकारी