ललितपुर। पितृपक्ष का शुभारंभ शनिवार को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ। लोगों ने अपने पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद कर जल तर्पण किया। गोविंद सागर बांध के कुंड और सुम्मेरा तालाब पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
पुरोहितों ने विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पितरों का तर्पण कराया। श्रद्धालुओं ने सुबह तालाबों और जलाशयों में स्नान किया। इसके बाद जल, कुश, अक्षत और तिल लेकर वैदिक मंत्रों से पितरों को जल अर्पित किया। पुरोहितों ने पितरों का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित किया। लोगों ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की। घरों में भी श्राद्धकर्म संबंधी धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। लोगों ने तिथि अनुसार पूर्वजों की पसंद के पकवानों का भोग लगाया। जरूरतमंदों को दान-पुण्य किया और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी।
अपने पूर्वजों का श्राद्धकर्म करने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष का निवारण होता है। जीवन में बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुख समृद्धि के साथ साथ वंश में वृद्धि होती है। भोजन का कुछ हिस्सा कौआ, गाय, कुत्ता, चींटियों को निकालना चाहिए। पूर्वजों का श्राद्धकर्म अत्यंत फलदायी होता है। -पं. जगदीश पाठक शास्त्री
-
पितृपक्ष पूर्वजों के लिए समर्पित होते हैे, इन दिनों में गाय, कौआ, कुत्ते, चींटियों को भोजन कराने की परंपरा है, जाे हम अपने पूर्वजों से सीखते आ रहे हैं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हम वैदिक विद्वानों के मार्गदर्शन में अपने पूर्वजों के लिए पितृपक्ष में जल से तर्पण कर रहे हैें।-डॉ. शरद तिवारी
अधिकांश तौर पर हमें बताया जाता है कि हर समस्या पितृ दोष के कारण पैदा हुई है। उसे पितरों की नाराजगी से जोड़ लेते हैें। ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह समय तो अपनी पूर्वजों के योगदान को याद करने एवं उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने का होता है।-सूर्यकांत बबेले, निबऊआ