तालबेहट। क्षेत्र की बिजली आपूर्ति को अधिकारियों की लापरवाही का करंट मार गया। आलम यह है कि नगर में बमुश्किल 10 घंटे सप्लाई मिल पा रही है। उपभोक्ता का कहना है कि जर्जर मशीनों (पैनल) को बदलवाने में अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। कई गांवों की हालत तो और भी दयनीय है। इसका प्रमुख कारण जर्जर पैनल और ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर बताए जा रहे हैं।
तालबेहट में बिजली मुहैया कराने के लिए 66 केवी विद्युत सब स्टेशन का निर्माण कराया गया। लगभग 15 वर्ष पहले मूसलाधार बारिश में माताटीला बांध की डाउन स्टीम के मध्य खड़े बिजली के तीन टावरों के गिर जाने से आपूर्ति ठप हो गई थी। जिसके बाद 66 को 33 केवी में बदल कर रोड़ा ललितपुर से आपूर्ति कराई जाने लगी थी। लाइनों में फाल्ट के कारण 66 और 33 केवी के पांच एमवीए के दो ट्रांसफॉर्मर से बिजली आपूर्ति कराई गई। 66 से तीन फीडर संचालित होते हैं, जिनमें तालबेहट प्रथम, द्वितीय खांदी, तृतीय पूराकलां को और 33 केवी से व शहजाद, तेरई फाटक और बिजरौठा और बनगुवाकलां को जोड़ा गया। वर्तमान में बिजरौठा और बनगुवाकलां क्षेत्र की जनता को एक ही पैनल से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। पैनल काफी पुराने है। आए दिन खराब हो जाते हैं। पैनल के खराब होने से पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है।
सात की जगह छह पैनल काम कर रहे काम
इस समय उपकेंद्र पर सात के स्थान पर मात्र छह पैनल हैं। इससे बिजरौठा और बनगुवाकलां की जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोनों क्षेत्र की बिजली आपूर्ति एक ही पैनल से हो रही है।
नेट न आने की है प्रमुख समस्या
उपकेंद्र पर बिजली जमा करने के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों ने ऑनलाइन व्यवस्था की है। लेकिन यहां नेट न आने से बिल जमा करने में दिक्कत हो रही है। इस संबंध में अधिकारियों ने कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन नतीजा शून्य ही रहा।
ओवरलोड से आए दिन फाल्ट
उपकेंद्र में मात्र पांच पांच एमवीए के दो ट्रांसफॉर्मर पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति होती है। इसे लोड बढ़ जाता है। ट्रांसफॉर्मर फुंक जाते हैं या लाइनों में फाल्ट आ जाता है। कुछ दिन पहले एक पांच एमवीए का नया ट्रांसफॉर्मर जल जीवन योजना के लिए आया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई जा रही पानी की टंकियों में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
तालबेहट उपकेंद्र पर जर्जर मशीनों को बदलकर नई मशीनों को जल्द ही लगाया जाएगा। - संजय सिंह, अधीक्षण अभियंता