नगर का ऐतिहासिक मानसरोवर तालाब गर्मी शुरू होते ही बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन बन जाता है। लेकिन तालाब के रखरखाव को लेकर प्रशासन आंख बंद किए है। तालाब के कई घाटों पर जलकुंभी की भरमार है। ऐसे में तैराकों और लोगों को खुद ही यहां की सफाई करनी पड़ती है।
नगर का तालाब गर्मी में नगर और आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित होता आया है। वहीं, विद्यालयों की छुट्टी हो जाने के बाद तो तालाब पर सुबह से शाम तक बच्चों के आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है। सबसे अधिक भीड़ मंदिर घाट पर होती है। जहां नगर के कुछ लोगों द्वारा नियमित जलकुम्भी हटाने का कार्य करने के कारण घाट पर जलकुम्भी की मात्रा अन्य घाटों से कम है। जिसके कारण बच्चें यहां तैरना सीखते हैं।
चुनाव के समय तालाब की साफ-सफाई के नाम पर समाचार पत्रों और सोशल साइट पर अपना फोटो डालने वालों की कमी नहीं है। परंतु यह लोग फिर भी साफ-सफाई के नाम पर कुछ न कुछ अवश्य करते हैं। परंतु प्रशासन के स्तर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
तालाब की ओर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए: डॉ. झा
तालबेहट (ललितपुर)। पतंजलि योग पीठ के जिलाध्यक्ष डॉ. हरिश्चंद्र झा का मानना है कि इतना विशाल तालाब पूरे बुंदेलखंड में नहीं है। प्रशासन इस तालाब के प्रति संवेदनहीन है। प्रशासन को इस तालाब के घाटों को और सुंदर तथा गर्मी में यहां तैराकी सीखने आने वाले बच्चों की सुविधा के लिए कुछ स्थानों पर पर्याप्त व्यवस्था करना चाहिए।
लोगों को भी प्रयास करना चाहिए: अन्नू चौबे
तालबेहट (ललितपुर)। समाज सेवी अन्नू चौबे का मानना है नगर का तालाब एक ऐतिहासिक विरासत है। इससे नगर की पहचान है। इसको सहेज कर रखना हम सबका कर्तव्य है। इसके लिए हमें अपने आपसी मतभेद भुला कर संयुक्त रूप से प्रयास करना चाहिए।