शुक्रवार की मध्य रात में इस बार का सबसे लंबा और सूर्यग्रहण पड़ा। इससे नौ घंटे पहले सूतक लगने से मंदिरों के कपाट दोपहर में ही बंद कर दिए। जिसके बाद मंदिर में प्रवेश व पूजा अर्चना रोक दी गई। हालांकि मंत्रों का जप तप करते हुए शांति पाठ आयोजित किए गए।
शुक्रवार को मध्य रात 11.54 बजे से अगले दिन तड़के 3.49 बजे माना गया। जिसके चलते चंद्रग्रहण शुरू होने से करीब नौ घंटे पहले शुक्रवार को दोपहर 2.54 बजे से सूतक लगने पर मंदिरों के पट बंद दिए गए। जिसके चलते दोपहर में सूतक लगने के दौरान मंदिरों में पूजा अर्चना रोक दी गई और सभी धार्मिक अनुष्ठान भी बंद हो गए। वहीं गुरु पूर्णिमा होने के पर मंदिरों में अन्य आयोजन व गुरु व संतों का पूजन भी सूतक लगने से पहले तक ही किया गया। इसके चलते मंदिरों में शाम को होने वाली आरती आयोजन भी नहीं हुए। जिसके चलते वर्ष में जनवरी माह में चंद्रग्रहण पड़ने के बाद दूसरी बाद मंदिरों में घंटों घड़ियाल की आवाज शाम की पूजा के लिए सुनाई नहीं दी। चंद्रग्रहण का प्रभाव खत्म होने के बाद शुद्घि के साथ आज शनिवार को विधिवत मंदिरों में पूजा अर्चना व आरती होगी। सुबह की पूजा से पहले भगवान का अभिषेक व पोषाक बदली जाएंगी। घरों में भी सनातनधर्मी चंद्रग्रहण के बाद शनिवार को विधि विधान के साथ सुबह ही पूजा करेंगे। पंडित ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि चंद्रग्रहण के नौ घंटे पहले सूतक लगने पर मंदिरों में भगवान का स्पर्श और पूजा वर्जित होती है। इसके चलते मंदिरों में पूजन व आरती नहीं होती है।