मरीजों की सुविधा को देखते हुए प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पताल में सामान्य मरीजों को पांच दिन तथा गंभीर रोगियों को एक साथ 10 दिन की दवाइयां बांटे जाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन, मौजूदा दौर में अनुबंधित कंपनियों से दवाओं की आपूर्ति नहीं होने के कारण जिला अस्पताल में दवाइयों का संकट गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि जिला अस्पताल की ओर से 41 कंपनियों से दवा की मांग की गई थी, जिसमें से महज छह कंपनियों ने ही दवा की आपूर्ति की है। जबकि, अनुबंध की शर्तों के मुताबिक आर्डर देने के एक माह के अंदर दवाई की आपूर्ति कर दी जानी चाहिए।
विभागीय अफसरों का कहना है कि आर्डर देने के दो महीने बीतने के बाद भी 35 कंपनियों ने दवा की आपूर्ति नहीं की है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जनपद मुख्यालय स्थित जिला चिकित्सालय में नगरीय क्षेत्र के अलावा ग्रामीण क्षेत्र से मरीज उपचार के लिए आते हैं। इन मरीजों के इलाज में एक महीने में छह से आठ हजार ग्लूकोज की बोतलों की खपत होती है। इसी तरह, लगभग 40 हजार पैरासीटामोल गोलियां, 70 हजार एंटीबायोटिक कैप्सूल और छह से आठ हजार एंटीबायोटिक इंजेक्शन की खपत प्रतिमाह होती है। जिला अस्पताल के स्टोर में महज 10 दिन तक की दवाइयों की उपलब्धता शेष रह गई है। इन हालातों में यदि कंपनियों की ओर से जल्द ही आपूर्ति नहीं की गई तो अस्पताल में दवा का संकट गहरा सकता है। इन पहलुओं को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सालय प्रशासन ने सभी प्रकार के मरीजों को पांच दिन के बजाय अब तीन दिन की दवाइयां बांटने के निर्देश जारी कर दिए हैं।