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Lalitpur News: मेडिकल कॉलेज की कॉलोनी में बिना शुद्धिकरण के बोरिंग के पानी की आपूर्ति

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सालों से नहीं हुई सीडब्लूआर की सफाई, कर्मियों को मंगवाना पड़ रहा कैंपर का पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आवासीय कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। कॉलोनी में रहने वाले मेडिकल कॉलेज व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को बोरिंग से सीधे पानी सप्लाई किया जा रहा है। यह पानी क्लीन वाटर रिजर्व (सीडब्लूआर) के जरिए टंकी में भरकर घरों तक पहुंचता है, जबकि सीडब्लूआर की वर्षों से सफाई नहीं हुई है। ऐसे में पानी की शुद्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थिति यह है कि लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों को ही शुद्ध पेयजल की गारंटी नहीं मिल पा रही है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि मजबूरन उन्हें कैंपर मंगाकर पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। पूर्व में जल संस्थान से एक अलग पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पानी की आपूर्ति की जाती थी। यह लाइन वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) से जुड़ी थी और पानी पहले सीडब्लूआर में संग्रहित होकर टंकी के माध्यम से कॉलोनी तक पहुंचता था। पाइपलाइन खराब होने के बाद विभाग ने बोरिंग के जरिए सीधे जलापूर्ति शुरू कर दी।
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कॉलोनी में रहने वाले एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंटेक वॉल्व (इंटेक बेल) की कई वर्षों से सफाई नहीं हुई है। सीडब्लूआर में गंदगी और जीव-जंतु पड़े रहते हैं। शिकायत करने पर आवास आवंटन निरस्त करने की धमकी दी जाती है।
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सीडब्लूआर के पास ही डंप होता है कूड़ा
सीडब्लूआर के आसपास कॉलोनी का कचरा फेंका जाता है। तेज हवा में कचरा टंकी के पास तक पहुंच जाता है। अधिक कचरा होने पर उसे जला दिया जाता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को धुएं से परेशानी उठानी पड़ती है।

बोरिंग से जलापूर्ति की क्या है प्रक्रिया
जल निगम के अधिकारियों के अनुसार नलकूप या बोरिंग के पानी की सप्लाई से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच अनिवार्य है। जांच में पानी सही पाए जाने पर शुद्धिकरण के लिए डोजर लगाया जाता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता अवनीश कुमार ने बताया कि बिना टेस्टिंग और डोजिंग के पानी की आपूर्ति नहीं की जाती। साथ ही सीडब्लूआर की सफाई प्रत्येक छह माह में कराना जरूरी है।
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नदियों से जलापूर्ति की प्रक्रिया
नदी या बांध से पेयजल लेने के लिए पहले इंटेक वेल बनाया जाता है। इसके बाद पानी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में शुद्ध कर सीडब्लूआर में संग्रहित किया जाता है, जहां से सप्लाई की जाती है।

बोले जिम्मेदारसीधे बोरिंग से जलापूर्ति की जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराकर सीडब्लूआर की सफाई और पानी के शुद्धिकरण की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाएगी।
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डॉ. गजेंद्र सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

प्रत्येक व्यक्ति को स्वच्छ पेयजल मिलना चाहिए। यदि मेडिकल कॉलेज कॉलोनी में बिना शुद्धिकरण पानी की सप्लाई हो रही है तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सत्यप्रकाश , जिलाधिकारी
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