नगरवासियों की आस्था का प्रतीक नगर का प्राचीन सुम्मेरा तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। इसके जीर्णोद्धार के नाम पर 2014 से अब तक चार करोड़ 30 लाख रुपये खपाए जा चुके हैं, और तो और छह माह पूर्व तालाब को संवारने के लिए एक करोड़ 77 लाख 12 हजार रुपये की अंतिम किश्त भी जारी की जा चुकी है। लेकिन तालाब पर कुछ भी काम दिखाई नहीं देता। अब वर्तमान में तालाब के जीर्णोद्धार का कार्य पर्यटन विभाग द्वारा कराया जा रहा है।
पर्यटन विभाग द्वारा सुम्मेरा तालाब को संवारने का कार्य यूपीसीएल संस्था द्वारा कुल चार करोड़ तीस लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। जीर्णोद्धार का कार्य विगत वर्ष 2014 में शुरू किया गया था। शासन ने पर्यटन विभाग को चार मार्च 2014 में 50 लाख रुपये की पहली किश्त जारी की थी, इसके बाद छह माह बाद 15 सितंबर को एक करोड़ रुपये की दूूसरी किश्त जारी की गई थी। इसके बाद तीसरी किश्त एक करोड़ चार लाख 65 हजार रुपये की 20 मई 2015 में जारी की गई थी। शासन ने पर्यटन विभाग को इस कार्य की अंतिम किश्त करीब छह माह पूर्व 30 जून 2016 को एक करोड़ 77 लाख 12 हजार रुपये की जारी की जा चुकी है।
लेकिन अंतिम किश्त जारी होने के बाद यहां कार्य पूरे तरीके से ठप पड़ा है, निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट शून्य है। कार्यदायी संस्था द्वारा बरती जा रही इस लापरवाही पर विभाग के प्रशासन कोई कार्रवाई करने से कतरा रहा है, जिससे कार्यदाई संस्था के हौसले बुलंद हैं। बीते एक वर्ष शहर में सूखे के हालात थे, जिस कारण तालाब का भू-तल पूरी तरह से सूख गया था, इस दौरान यदि कार्यदायी संस्था चाहती तो आसानी से जलकुंभी, चोई व सिल्ट निकालने और गहरीकरण का कार्य किया जा सकता है। विगत माह हुई बारिश और दो माह पूर्व जल बिहार पर्व के दौरान नगर पालिका द्वारा तालाब की सफाई कराई गई थी और विमान के जलबिहार के लिए गोविंद सागर बांध के पानी से इस तालाब को भरवाया गया था। वर्तमान में करीब 25 प्रतिशत सीसी मार्ग व टिचिंग का निर्माण कार्य, घाटों की मरम्मत, तालाब की सफाई और गहराई का कार्य शेष रह गया है।
तालाब के जीर्णोद्धार केे भेजा जा चुका है प्रस्ताव
ललितपुर। प्रदेश सरकार द्वारा भू-जल स्तर को रोकने के उद्देेश्य से नगरीय झील/तालाब/पोखर संरक्षण योजना चलाई जा रही। पूर्व से संचालित इस योजना के तहत नगरीय क्षेत्रों में स्थित बदहाल हो चुके तालाबों, झीलों और पोखरों के जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसी योजना के तहत नगर पालिका ने दो माह पूर्व करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसमें सुम्मेरा तालाब को संवारने के लिए 2.21 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। तालाब के जीर्णोद्धार के लिए भेजे गए इस प्रस्ताव में तालाब की साफ-सफाई, घाटों का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में तालाब के घाटों पर सादा पत्थर बिछे हुए हैं, जो कई जगहों से उखड़ गए हैं। नगर पालिका के प्रस्ताव के अनुसार तालाब पर बने पुराने घाटों का विस्तार किया जाएगा। वहां लगे पुराने पत्थरों को निकालकर पर मार्बल स्टोन बिछवाया जाएगा। लोगों की सुरक्षा के लिए घाटों पर रेलिंग भी लगाई जाएगी। रात के समय तालाब को अधिक खूबसूरत बनाने के लिए विशेष लाइटिंग की जाएगी। यह जानकारी नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल ने दी है।
चर्मरोग से मुक्ति की आस्था हुई खत्म
जनपद का नाम महाराजा सुम्मेर सिंह की धर्म पत्नी ललितादेवी के नाम पर ललितपुर पड़ा है और महाराजा सुम्मेर के नाम पर तालाब का नाम सुम्मेरा तालाब रखा गया है। यह तालाब वर्षों पुराना तालाब हैं ऐसी मान्यता है कि इस तालाब में स्नान करके से चर्मरोग से मुक्ति मिलती थी, ऐसा मानते हैं कि तालाब में स्नान करने से महाराज सुम्मेर सिंह को चर्मरोग से मुक्ति मिल गई थी, जिस कारण उन्होंने इस तालाब का नाम सुम्मेर रखा था। लेकिन यह शहरवासियों का दुर्भाग्य हैं कि कुछ वर्षों पहले तक जिस तालाब में लोग दूर-दूर से स्थान कर अपने चर्म रोग दूर करने के लिए आते थे, उस तालाब की स्थिति ऐसी हो गई कि अब तो इस तालाब के पानी से स्नान करेगा उसको चर्मरोग हो जाएगा। इस संबंध में तालाब के पास बने करीब तीन सौ वर्ष पुराने श्री नृसिंह मंदिर के पुजारी राममनोहर दास जी महाराज बताते हैं कि उनको मंदिर में सेवा करते हुए करीब 40 वर्ष बीत गए हैं। पूर्व में इस तालाब जल इतना चंचल व शुद्ध था कि इसका उपयोग लोग अपने चर्मरोगों को दूर करने और पीने के लिए उपयोग करते थे, साधू संत यहां स्नान करते थे, लेकिन तालाब की वर्तमान दुर्दशा को देखकर बहुत दुख होता है।