ललितपुर। जिले में खनिज संपदा को ठिकाने लगाया जा रहा है। सैंड स्टोन की खदानों के माइनिंग प्लान स्वीकृत होने से पहले ही खनन जारी है। स्थिति यह है कि बुंदेलखंड के तीन जिलों में माइनिंग प्लान से ज्यादा खनन करने से शासन को करीब पचास करोड़ रुपए की चपत लग चुकी है। अच्छे पत्थर के लिए खदान मालिक अपनी निर्धारत जगह छोड़कर अवैध रूप से सूमे की पहाड़ी को खोखला कर रहे हैं।
जनपद की सैंड स्टोन की खदानों के माइनिंग प्लान स्वीकृत नहीं होने का मामला गत वर्ष शासन के संज्ञान में आया था। इसपर आनन-फानन में खनिज विभाग की ओर से सभी खदान मालिकों से माइनिंग प्लान जमा कराने को कहा।
माइनिंग प्लान जमा होने के बाद खनिज निदेशालय मंजूरी के लिए भेज दिए गए, लेकिन अभी तक कोई भी माइनिंग प्लान स्वीकृत होकर खनिज विभाग को नहीं मिला है, जबकि खनन धड़ल्ले से हो रहा है। यह खनन कोई नई बात नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से चल रहा है, इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह आती है कि वर्षों के खनन के बाद खदान का माइनिंग प्लान स्वीकृत लीज आवंटन के समय से करें या वर्तमान स्थिति के मुताबिक।
माइनिंग प्लान स्वीकृत नहीं होने का लाभ उठाते हुए जनपद के कई खदान मालिकों ने अपनी खदान की सीमा को छोड़कर बगल में स्थित अच्छे पत्थर की खदान में काम शुरू कर दिया।
सूत्रों के अनुसार जिस खदान के नाम पर खननकर्ताओं की लीज हुई है, अगर वहां का भौतिक सत्यापन किया जाए तो हकीकत में खनन कागज में तय जगह के विपरीत दूसरी जगह पर किया जाना पाएगा। कई खदानें ऐसी हैं, जिनके नाम पर करोड़ों रुपए के एमएम-11 प्रपत्र जारी हो चुके हैं, लेकिन हकीकत में उस खदान में कभी कोई खनन नहीं हुआ है।
अगर उच्च स्तरीय जांच की जाए तो खदान मालिकों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना हो सकता है। ग्राम धौर्रा के पास मौजूद सूमे की पहाड़ी के ईद-गिर्द कई खदानों के पट्टे हैं, लेकिन यहां खदान मालिक अपनी जगह छोड़कर सूमे की पहाड़ी पर अच्छा पत्थर होने के कारण पहाड़ी को खोखला कर रहे हैं।
करोड़ों का कर डाला खेल
खनिज संपदा की लूट मची है। सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। बुंदेलखंड के तीन जिलों हमीरपुर, महोबा व ललितपुर में दो अरब रुपये से ज्यादा की ट्रांजिट फीस को वन विभाग में जमा ही नहीं किया गया। हमीरपुर में खदान मालिकों ने एक अरब दो लाख रुपए, महोबा में 86 लाख रुपए, ललितपुर में पचास लाख रुपए की ट्रांजिट फीस की चोरी की गई है।
इसके अलावा झांसी, महोबा और ललितपुर जिले में 12 खदान मालिकों ने 50.33 करोड़ रुपए का अवैध खनन कर लिया है। खनिज विभाग के दस्तावेजों की जांच में सामने आया है कि तीनों जिलों की कुल 12 खदानों ने तय क्षेत्रफल से ज्यादा में खनन कर शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का चूना लगाया है।
यूपीएमएमसी के नियम 34 (2) के अनुसार खदान की लीज होते ही एमएम-1 फॉर्म के साथ माइनिंग प्लान भी जमा करना पड़ता है, लेकिन खदानों की लीज होने के बाद से आज तक विभाग में माइनिंग प्लान जमा नहीं कराया गया, बल्कि खनन माफिया द्वारा नियम विपरीत जाकर करोड़ों रुपए का खनन कर लिया गया।
विभागों में फर्जी एमएम-11 का खेल
लोक निर्माण विभाग, आरईएस जैसी सरकारी कार्यदायी संस्थाओं के ठेकों में उपयोग में लाए जाने वाली खनिज सामग्री की रॉयल्टी ठेकेदार को जमा कर उसके सबूत के तौर पर एमएम-11 प्रपत्र संबंधित विभाग में भुगतान के लिए जमा करने होते हैं।
खनन विभाग के ऑडिट में फर्जी एमएम-11 प्रपत्र का खेल उजागर हुआ है। बुंदेलखंड के झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा और चित्रकूट जिलों के पीडब्लूडी व आरईएस विभागों में जमा एमएम- 11 प्रपत्रों की जांच में सामने आया है कि लगभग 40 फीसदी प्रपत्र फर्जी हैं।
ठेकेदारों ने एमएम-11 प्रपत्र की ऑफिस कॉपी व प्रथम कॉपी जमा कर दी है, जबकि नियमानुसार ऑफिस कॉपी केवल लीज होल्डर के लिए व प्रथम कॉपी खनिज के परिचालन के दौरान चेकपोस्ट पर उपयोग के लिए होती है। नियमानुसार सरकारी विभागों में द्वितीय कॉपी जमा करनी चाहिए। द्वितीय कॉपी ही रॉयल्टी जमा करने की गारंटी देने वाला प्रपत्र होता है।
क्या है माइनिंग प्लान?
यूपीएमएमसी के नियम 34 (2) के अनुसार खदान की लीज होने पर एमएम-1 फॉर्म के साथ माइनिंग प्लान जमा करना पड़ता है। माइनिंग प्लान वह प्रपत्र है, जिनमें खदान की सारी भौतिक स्थितियों के साथ खनन उत्खनन संबंधी जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जाती हैं, इसमें खदान से कब और कितना खनन होगा, इसकी सीमा तय कर दी जाती है। दिलचस्प बात यह है कि जनपद में सैंड स्टोन की खदानें वर्षों से बिना माइनिंग प्लान के संचालित हो रही हैं और करोड़ों रुपये का खनन कर लिया गया। विभागीय जानकारों की मानें तो पिछले वर्ष सभी सैंड स्टोन खदानों के जो माइनिंग प्लान खनिज निदेशालय भेजे गए थे, उनमें कुछ तथ्यों को छोड़कर सभी जानकारी समान हैं।
माइनिंग प्लान किसी भी सैंड स्टोन खदान का स्वीकृत नहीं है। पिछले वर्ष निदेशालय को स्वीकृति के लिए माइनिंग प्लान भेजे गए थे, लेकिन अभी स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। विभाग समय-समय पर दौरा कर अवैध खनन को रोकने के लिए छापामार कार्रवाई कर रहा है। माइनिंग प्लान के अनुरूप खनन कराना मुश्किल है।
-सन्नी कौशल, जिला खान अधिकारी, ललितपुर।