1979 में तत्कालीन राष्ट्रपति एन संजीवा रेड्डी से हुए थे पुरुस्कृत
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले में भी कई ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने जिले में शिक्षा नींव और भविष्य को तैयार करते हुए उन्हें एक मुकाम तक पहुंचाया। शिक्षक भगवत सिंह इन्हीं में से एक हैं। 90 वर्ष की आयु में आज भी भगवत सिंह बच्चों को शिक्षा का महत्व और बेहतर भविष्य के लिए जागरूक करते हैं। भगवत सिंह जिले के पहले ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर 1979 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
कस्बा महरौनी के अथाई मोहल्ला निवासी भगवत सिंह का जन्म वर्ष 1934 में एक किसान परिवार में हुआ था। 22 वर्ष की आयु में वर्ष 1958 में वह शिक्षक बने। पहली तैनाती ब्लॉक बिरधा के ग्राम पड़ना-चीमना में स्थित प्राथमिक विद्यालय में हुई। इसके बाद वह जनपद के कई विद्यालयों में अपनी सेवाएं देते रहे। धोती-कुर्ता और सिर पर गांधी टोपी की पहचान रखने वाले भगवत सिंह अद्भुत गुणों के धनी है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का प्रचार प्रसार किया और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया।
खासकर बालिका शिक्षा पर उनका अधिक जोर रहा था। उनकी जागरुकता का असर यह रहा कि एक समय जहां विद्यालय में बालिकाओं का पंजीयन न के बराबर रहता था वह बढ़ने लगा और लोग अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए स्कूल में भेजने लगे थे। भगवत सिंह वर्ष 1998 में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए। महरौनी में स्थित प्राथमिक विद्यालय में वह 31 वर्ष तक शिक्षक के पद पर रहे और इसी विद्यालय से वह सेवानिवृत्त हुए।