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जागरूकता से ही बचायी जा सकती विलुप्त हो रही गौरैया

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गौरैया के लिए घोंसला तैयार करते बच्चे। - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। समय रहते विलुप्त होती प्रजाति पर ध्यान नहीं दिया गया तो वह दिन दूर नहीं जब गिद्धों की तरह गौरैया भी इतिहास बन जाएगी और यह सिर्फ गूगल और किताबों में ही दिखेगी। करुणा इंटरनेशनल क्लब में बुधवार को गौरैया बचाने के लिए जागरूकता विषय पर परिचर्चा की गई। बच्चों ने गौरेया के घोंसले तैयार किए।
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इस उपलक्ष्य में ग्रामीण बच्चों को गौरैया की कहानी सुनाकर जानकारी दी गई तो बच्चों ने संकल्प लिया कि हम गौरैया का संरक्षण करेंगे और घरों में गौरैया का घोंसला लगाकर उसे अपने घर भी बुलाएंगे। बच्चों ने घोंसला तैयार करवाकर उसे लगाने का फैसला लिया है। वह घौंसलों पर पेंटिंग करके उन्हें घर की छत, आंगन, बालकनी में लगाकर गौरैया संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि प्यारी गौरैया कभी घर की दीवार पर लगे आइने पर अपनी हमशक्ल पर चोंच मारती तो कभी खाट के नजदीक आती। बदलते वक्त के साथ आज गौरैया दिखाई नहीं देती। वर्तमान समय में गौरैया को बचाने के लिए अभियान चलाकर बच्चों को जागरूक करके गौरैया का संरक्षण किया जा सकता है। देवीशंकर कुशवाहा ने बताया कि दुनिया भर में 20 मार्च गौैरैया संरक्षण दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2010 में पहली बार यह दुनिया में मनाया गया। प्रसिद्ध उपन्यासकार भीष्म साहनी ने अपने बाल साहित्य में गौरैया पर बड़ी अच्छी कहानी लिखी है। जिसे उन्होंने गौरैया नाम दिया है।
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