ललितपुर। समाजवादी पार्टी में चल रही अंदरूनी उठापटक, कार्यकर्ताओं को अपने साथ में न ला पाना ज्योति को महंगा पड़ा। उनका टिकट काट दिया गया।
सपा ने ज्योति लोधी को समीकरण साधते हुए टिकट दिया था। सदर सीट पर लोधी वोट करीब पचास हजार हैं। वहीं करीब इतना ही वोट बैंक महरौनी विधानसभा में लोधी समाज का है। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद चंदपाल सिंह यादव का हाथ टिकट दिलाने में था। कुछ महीनों से चंद्रपाल सिंह यादव का पार्टी में असर पर प्रभाव पड़ा है। झांसी में दीपमाला कुशवाहा व बबीना में श्याम सुंदर यादव को टिकट मिलने का चंद्रपाल गुट ने जमकर विरोध किया था। विरोध के बावजूद दोनों को टिकट मिला। बाद में डा चंद्रपाल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष पद से मुक्त कर दिया गया। अब ज्योति सिंह लोधी का टिकट कटना भी पार्टी की अंदरूनी उठापटक का नतीजा माना जा रहा है।
वहीं, सत्ताधारी पार्टी की प्रत्याशी घोषित होने के बाद ज्योति लोधी जिस तरीके से अपना चुनाव प्रचार अभियान चला रही थी, वह उनके पक्ष में नहीं गया। करीब सात महीने पहले घोषित की गई प्रत्याशी के बावजूद ज्योति लोधी का चुनाव प्रचार इस तरह जोर नहीं पकड़ पाया, जिससे लगे कि वह सत्ताधारी पार्टी की प्रत्याशी हैं। हालांकि वह लगातार जनता के संपर्क में रहीं और सामाजिक कार्यों में उनकी उपस्थिति बनी रही, लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में अपने पक्ष में माहौल वह नहीं बना पाई। कार्यकर्ताओं की फौज तैयार नहीं हो हो पाई। पिछले दिनों हुए बूथ अध्यक्षों के सम्मेलनों में पार्टी की गुटबाजी खुलकर सामने आयी थी।
वहीं सपा का टिकट बदले जाने से जनपद की राजनीति में हलचल मची हुई है। समाजवादी पार्टी ने महीनों पहले ललितपुर सदर से ज्योति सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया
सपा का प्रत्याशी घोषित होने के बाद गुड्डु राजा के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस पैदा हो गया था। कयास लगाए जाने लगे थे कि इस बार बुंदेला परिवार का कोई सदस्य विधान सभा चुनाव नहीं लड़ेगा। क्योंकि, जनपद बनने के बाद हुए दूसरे विधानसभा चुनाव से बुंदेला परिवार ने हर विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया है। लेकिन, इन कयासों पर विराम लग गया है। सपा के टिकट में फेरबदल होने के साथ नए- नए समीकरण सामने आने लगे हैं। इस बदलाव को कोई अपने हित में, तो कोई अपने विरोध में मानकर चल रहा है। सपा व बसपा अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, तो भाजपा व कांग्रेस के लिए कई नाम सामने आ रहे हैं। ज्योति का टिकट कटने से भारतीय जनता पार्टी के नेता राहत महसूस कर रहे हैं। ज्योति को टिकट मिलने के बाद उन्हें अपना लोधी वोट बैंक खिसकता दिख रहा था।
जनपद की राजनीति में अहम दखल
बुंदेला परिवार का जनपद की राजनीति में अहम दखल रहा है। जनपद के पहले जिला पंचायत अध्यक्ष सुजान सिंह बुंदेला रहे। 1980 के विधान सभा चुनाव में सुजान सिंह बुंदेला ने महरौनी विधानसभा से चुनाव जीता। उन्होंने 1984 में झांसी-ललितपुर सीट से सांसद का चुनाव जीता। हालांकि ललितपुर विधानसभा सीट पर सक्रिय राजनीति में बुंदेला परिवार ने खासे दखल के बावजूद काफी समय बाद हाथ अजमाया था। वर्ष 2002 में वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कांग्रेस सीट से सदर सीट जीती थी।
महरौनी विधानसभा सीट पर सुजान सिंह बुंदेला के बाद उनके चचेरे भाई पूरन सिंह बुंदेला ने वर्ष 1991 से वर्ष 2007 तक लगातार चुनाव में हिस्सा लिया। 2012 में महरौनी विधानसभा के सुरक्षित घोषित हो जाने के बाद वहां से बुंदेला परिवार की दूरी बन गई। चंद्रभूषण सिंह बुंदेला ने पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम 2009 में तत्कालीन विधायक नाथू राम कुशवाहा की असमय मौत से हुए उपचुनाव में रखा था। उपचुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे। 2012 के चुनाव में सपा के टिकट से लड़े गुड्डु राजा को दूसरे नंबर से संतोष करना पड़ा। जहां पूरे राज्य में सपा की लहर चली, वहीं जनपद में हार का स्वाद चखना पड़ा।
जनता व पार्टी का आदेश सर्वोपरि
सपा नेता गुड्डु राजा ने सदर सीट से प्रत्याशी घोषित होने के बाद कहा कि यह जनता व पार्टी का आदेश है। इसे वह सर्वोपरि मानते हैं। पार्टी द्वारा जो जिम्मेदारी दी गई है, उसे निभाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनपद से सपा दोनों विधानसभा सीट पर चुनाव जीतेगी।