फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोजगार है न सिंचाईं को पानी सपा जिलाध्यक्ष के गांव की यही निशानी

विज्ञापन
विज्ञापन
ललितपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार में रहते हुए यदि नहर से सैपुरा गांव में सिंचाई की सुविधा मुहैया करा दी होती तो शायद आज गांव की करीब डेढ़ सौ एकड़ भूमि बंजर नहीं होती। इससे रोजगार की समस्या समाप्त हो जाती। इस बात की टीस गांव के लोगों में है। उधर, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तिलक सिंह यादव ने भी अपने पुश्तैनी गांव सैपुरा को अपने हाल पर छोड़ रखा है। अधिकांश सहरियों के पास रोजगार नहीं है, न रहने को आवास है। कुछ तो इससे परेशान होकर गांव से पलायन कर गए हैं।
विज्ञापन

विकासखंड बिरधा की ग्राम पंचायत सैपुरा में मजरा रमपुरा भी लगता है। इन दोनों ही गांवों में सहरिया आदिवासियों की संख्या अच्छी खासी है। इसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों की संख्या है। सैपुरा गांव में सिंचाई के लिए नहर का साधन नहीं है, जिससे यहां के किसानों की खेती बरसात पर निर्भर है। सिंचाई के पर्याप्त साधनों के अभाव में करीब डेढ़ सौ एकड़ भूमि में खेती नहीं हो पाती है। मजरा रमपुरा में खदानों को तालाब का रुप दिया गया था, इससे फसल की एक बार ही सिंचाई हो पाती है। किसानों को दूसरी बार सिंचाई की समस्या खड़ी हो जाती है। पत्थर की खदानें बंद होने से कई कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। वह मनरेगा में मजदूरी का काम करने के लिए तैयार नहीं हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सैपुरा से सौ से ज्यादा एवं रमपुरा में करीब दो सैकड़ा लोग पलायन कर गए हैं। रमपुरा में पीने के पानी की समस्या है। यहां आमतौर पर बोरिंग सफल नहीं है। वर्तमान में दो हैंडपंपों से ही लोगों को पानी उपलब्ध हो पाता है। गर्मियों में टैंकर से पानी की आपूर्ति हो पाती है। ग्राम सैपुरा में करीब चौबीस हैंडपंप स्थापित हैं। कुछ जगह हैंडपंप की दूरी अधिक होने से लोगों को परेशान होना पड़ता है।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव जिले के दौर पर आए थे, तब वह देवगढ़ जाते समय कुछ देर के लिए ग्राम सैपुरा में रुके थे। ग्रामीणों ने नहर की मांग की थी। उन्होंने आश्वासन भी दिया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तिलक यादव का इस गांव से नाता है। मौजूदा समय में भी वह सपा के जिलाध्यक्ष हैं। इससे पहले वे पार्टी की ओर से छत्तीसगढ़ प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह एक से अधिक बार सत्तारूढ़ दल के जिलाध्यक्ष रहे हैं। यही नहीं, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थे, उस समय भी पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे हैं। इसके अलावा वे चार बार विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। लगभग दो दशक से राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन उन्होंने ग्राम सैपुरा के विकास पर ध्यान नहीं दिया, जिससे गांव का विकास ठहरकर रह गया है। इसका विपरीत असर सहरिया आदिवासियों पर पड़ा है। वे आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। किसी को शौचालय तो किसी को आवास की दरकार है। कुछ लोगों ने अभी भी रोजगार की उम्मीद नहीं तोड़ी है। जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में मौन बने हैं।
गांव में कई लोगों के शौचालय बन गए हैं, लेकिन उसे इस योजना का लाभ नहीं मिला है। सहरिया बस्ती में रोजगार की समस्या है। लोग चबूतरा पर फुर्सत में बैठे दिखाई देते हैं। कुछ लोग गांव छोड़कर चले गए हैं।
- राजेश
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए फार्म भरा था, लेकिन आवास स्वीकृत नहीं हो पाया है। इस कारण कच्चे मकान में रहना पड़ रहा है। बारिश के दिनों में काफी परेशानी होती है।
- दिनेश
सरकारी योजनाओं के कई नाम सुनने को मिल जाते हैं, लेकिन उसे शौचालय योजना का ही अब तक लाभ मिल पाया है। इसके निर्माण के दौरान शौचालय का गड्ढा ही नहीं खोदा गया है।
- हरप्रसाद
सहरिया बस्ती में कुछ लोगों को ही आवास का लाभ मिला है। अधिकतर लोग कच्चे घरों में रहते हैं। रोजगार की भी बड़ी समस्या बनी हुई है। कुछ लोग तो किसी तरह समय बिताते हैं।
- शीला
गांव का विकास जिस तेजी से होना चाहिए था, वह हो नहीं पाया है। जिले के कई गांव सैपुरा से आगे हो गए हैं। सहरियों की कोई सुनने वाला नहीं है।
- कमलेश
गांव में पानी की उतनी परेशानी नहीं है, लेकिन गर्मियों के आते-आते पानी की समस्या पैदा हो जाती है। रमपुरा गांव में पानी का हाल खराब है। हैंडपंपों की कमी होने से पानी की समस्या बनी रहती है।
- अजय यादव
गांव में फसलों की सिंचाई के लिए पानी का साधन नहीं है। इससे किसानों को बारिश के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। इस बार जो खेतों में फसल लहलहा रही है, उसका कारण इस बार बारिश ठीक हुई। यदि बारिश कम हो जाए तो गांव में खेती करना मुश्किल हो जाता है।
- गंगाराम
गांव में फसलों की सिंचाई के साधन मुहैया कराना चाहिए। न तो यहां कूप योजना आई और न ही खेत तालाब योजना। यदि गांव में योजना आई होती तो कूप व तालाब नजर आते। किसानों को योजनाओं के लाभ का इंतजार है।
- लक्ष्मन
अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद वह जिले के दौरे पर आए थे। उन्हीं के कार्यकाल में देवगढ़ रोड बना था। गांव में अधिकांश जगहों पर सीसी रोड बन गए हैं। पीने के पानी के लिए हैंडपंप है और बिजली का भी इंतजाम है। भाजपा के राज में पत्थर की खदानें बंद हो गई हैं, जिससे रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गई है। कई लोग दूसरे शहरों में जाकर काम कर रहे हैं।
- तिलक यादव, जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
गांव में वर्ष 2011 की सूची के अनुसार स्वीकृत आवासों का निर्माण कराया गया है। अभी नए आवास स्वीकृत नहीं हुए हैं। मनरेगा में नाला सफाई का कार्य चल रहा है। इसमें तीस श्रमिक काम कर रहे हैं, जबकि जरूरत सौ से डेढ़ सौ लोगों की है। कई श्रमिक इस योजना में काम ही नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन

- पानबाई ग्राम प्रधान, सैपुरा
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें