ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों में नामांकित बच्चों की गैरहाजिरी के सत्यापन में पेच फंस गया है। प्रधानाध्यापक द्वारा बच्चों की गैर हाजिरी एसएमएस से एनआईसी भेजी जा रही है, लेकिन अफसरों को उसका रिस्पांस नहीं मिल रहा है। इससे विद्यालयों की अचानक चेकिंग अधर में लटक गई है।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। इसके बाद भी स्कूलों में बच्चों का ठहराव समस्या बनी हुई है। बीते माह शासन ने समाजवादी पेंशन के लाभार्थी परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देने की योजना बनाई।
इसके तहत 37,039 लाभार्थी परिवारों का डोर टू डोर सर्वे कराया गया है। इसमें 23,610 बच्चे स्कूलों में नामांकित पाए गए थे। 37 बच्चे स्कूलों की दहलीज तक पहुंच नहीं सके थे, बाद में उनका नामांकन करा दिया गया। इन सभी के नाम समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर फीड करा दिए गए हैं।
इसके अलावा स्कूलों के अन्य 1,07,689 बच्चों की ऑफलाइन फीडिंग कराई है। पिछले दिनों शासन के निर्देश पर आनलाइन व ऑफलाइन बच्चों की गैरहाजिरी पर नजर रखने को एसएमएस से हाजिरी को शुरू किया गया। तमाम प्रधानाध्यापकों ने स्कूलों के गैरहाजिर बच्चों की संख्या एसएमएस से एनआईसी भेजी, लेकिन विभागीय अफसरों को उनका रिस्पांस नहीं मिला।
इससे एसएमएस से हाजिरी लेने का सिस्टम अधर में लटक गया है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसपी यादव का कहना है कि अफसरों के डिजिटल सिग्नेचर तैयार नहीं हो सके हैं, जिससे एसएमएस सिस्टम में बाधा आई है। जनवरी माह में इसे प्रभावी तरीके से चलाया जाएगा।
35 प्रतिशत दर्ज हो रही बच्चों की हाजिरी
परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति का बुरा हाल है। वर्तमान में करीब 30 से 34 प्रतिशत बच्चों की ही उपस्थिति दर्ज हो रही है। जानकारों का कहना है कि यदि एसएमएस सिस्टम प्रभावी तरीके से चालू हो गया तो स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति में अपेक्षित सुधार होने की संभावना है।