ललितपुर। शहर के गोविंद सागर बांध से सटे सीतापाठ के हजारिया महादेव की महिमा अपरंपार है। ऐसी मान्यता है यहां जो भी अपनी कोई इच्छा लेकर आता है महादेव उसके मन को भांप जाते हैं और बिना मांगे ही मनोकामना पूरी करते हैं।
गोविंद सागर बांध के समीप सीतापाठ में हजारिया महादेव का मंदिर है। ऐसा बताया जाता है कि यह मंदिर 500 वर्ष से अधिक पुराना है। त्रेता युग में वनवास काल में सीता जी एक रात यहां रुकी थीं। इसी कारण इस स्थान का नाम सीतापाठ पड़ा। पौराणिक कथाओं के अनुसार पहले यहां एक नदी बहती थी, जिसे रोककर एक तालाब बनाया गया था। ऐसा कहा जाता है कि इस तालाब में स्नान करने के कारण ही इसका नाम सीताकुंड पड़ा। यहां प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के समय मेला लगता है जो तीन दिनों तक चलता है। महाशिवरात्रि पर यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है। बताया जाता है कि इस कुंड का पानी कभी नहीं सूखता।
हले मंदिर का स्वरूप दूूसरा था। आस्थावानों ने इसे मनोकामना पूरी होने पर बनवाया। आज मंदिर अपने भव्य रूप में है। कस्बावासी प्रतिदिन यहां पूजा करने आते हैं। महाशिवरात्रि पर जिले के अलावा सीमा से सटे मध्य प्रदेश के लोग भी जलाभिषेक करने आते हैं।
- कमला गिरि, पुजारी हजारिया मंदिर सीतापाठ
कमला गिरि, पुजारी, हजारिया मंदिर सीतापाठ।- फोटो : LALITPUR