संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। होली की द्वितीया तिथि पर रविवार को भाई-बहन का पर्व भाई दूज श्रद्धा व उत्साह से मनाया गया। महिलाओं ने गाय के गोबर से बनाई गई दोजों की पूजा की और बहनों ने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
बुंदेलखंड में होलिका दहन के अगले दिन परमा पर कीचड़ की होली और द्वितीया तिथि पर भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। लेकिन, इस बार पूर्णिमा की दो तिथि होने के चलते होली का पर्व 14 मार्च से शुरू हुआ और द्वितीया तिथि एवं भाई दूज 15 मार्च के स्थान पर 16 मार्च रविवार को मनाई गई। द्वितीया पर्व यानि भाई दूज पर महिलाओं ने घरों के बाहर दरवाजे के दोनों कोनों पर गोबर की एक-एक दोज बनाई। फिर महिलाओं ने रविवार सुबह चबूतरों पर दरवाजे के बाहर गोबर से बनाई दोजों की हल्दी, चावल, रोली, दूध, अठवाईं, मिष्ठान आदि से पूजा की और आरती उतारी।
इसके बाद घर के सदस्यों की संख्या के अनुसार रुई की बनाई गई आंसें जोसें बाहर की दीवार पर चिपका कर पूजन किया गया। चबूतरों के किनारे सड़क पर रखकर कटाई पत्तियों को मूसल से कूटा गया। इसके बाद घर में ठाकुरजी की पूजा की गई। फिर बहनों ने भाइयों के माथे पर हल्दी, रोली, चावल और गुलाल से टीका कर भाइयों की लंबी उम्र की कामना की। भाइयों को मिठाई खिलाई, जिसके बाद भाइयों ने बहनों को उपहार दिए। त