महरौनी (ललितपुर)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के अंतर्गत हुए जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव परिणामों ने उलटफेर कर दिया। मतगणना के पहले तक जिस तरह की अटकलें लगायी जा रही थीं, परिणाम उसके विपरीत रहे। चुनाव में राजनीतिक दिग्गजों की पराजय से साफ हो गया कि मतदाता का मूड भांपने में राजनीति के जानकार पीछे रह गए।
महरौनी क्षेत्र में जिला पंचायत सदस्य पद के लिए वार्ड क्रमांक 16 गुढ़ा और वार्ड क्रमांक 17 सिलावन से चुनावी परिणामों के बाद दिग्गजों की हार का समाचार क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। सिलावन सीट से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बडौनियां व वर्तमान ब्लाक प्रमुख महरौनी शीतल बडौनियां की पुत्र वधु नीलम दुष्यंत बडौनियां को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। उनके समर्थक अपने प्रत्याशी की जीत को लेकर पूर्ण आश्वस्त थे,
लेकिन सारे गणित फेल हो गए। उन्हें अंजू बबीता यादव पत्नी महेंद्र यादव ने चुनावी समर में कड़ी चुनौती दी और बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसी सीट पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी बेबी कौशिक पत्नी ग्राम प्रधान दरौना अरविंद कौशिक और बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रामचरन गोडसे की पत्नी भी मतगणना के दौरान विजयी प्रत्याशी के इर्द-गिर्द तक नहीं फटक सकीं।
इसी तरह से गुढा सीट पर क्षेत्रीय राजनीति में अच्छा खासा रसूख रखने वाले पूर्व ब्लाक प्रमुख एवं जिला पंचायत सदस्य रहे दरयाब सिंह, इसी सीट से निवर्तमान जिला पंचायत सदस्य बृजेंद्र सिंह मैनवार और ग्राम प्रधान पथराई राजपाल सिंह को भी पराजय का मुंह देखना पडा। गुढ़ा सीट पर चंद्रशेखर खरे ने बडी जीत हासिल की और सबको चौंका दिया।
हालांकि, मतगणना शुरू होने के कुछ घंटे बाद तक तो दरयाब सिंह और चंद्रशेखर खरे के बीच कड़ी टक्कर चलती रही, लेकिन शाम होते- होते चंद्रशेखर ने बड़ी बढत बनानी शुरू कर दी। दोनों सीटों पर अप्रत्याशित बढत बनाकर विजयी प्रत्याशियों ने दिग्गजों की धड़कनें तेज कर दीं और मतगणना कार्य पूर्ण होने के काफी समय पहले ही दिग्गजों ने हार स्वीकार कर ली। विजयी प्रत्याशी जहां जीत का जश्न मनाते हुए अपने क्षेत्र के मतदाताओं के बीच नजर आ रहे हैं, वहीं शिकस्त खाए दिग्गज अपनी पराजय के कारण खोज रहे हैं।