ललितपुर। थाना जाखलौन के अंतर्गत ग्राम माताखेड़ा, हाल धौर्रा निवासी सीमा अपनी तीन बेटियों और एक बेटे को पालने के लिए ग्राम अमऊखेड़ा में दो खेतों में काम करती थी। दो साल पहले पति के गुजरने के बाद बच्चों की परवरिश उसके ही कंधों पर आ गई थी। इस कारण बच्चों का पेट भरने के लिए वह खेतों की रखवाली के काम के बदले अनाज लेती है। उसे दो खेतों की रखवाली से रबी की फसल का कुल सात बोरा अनाज मिलता है। इसके अलावा कटाई का काम करने भी कुछ अतिरिक्त मजदूरी मिल जाती है। इस तरह वह घर का गुजारा करती है।
ग्राम माताखेड़ा, हाल धौर्रा निवासी सीमा (40) पत्नी अपनी तीन पुत्रियों कल्लो (13), मोनिका (6), मंजू (4) और निकेत (2) के साथ गांव अमऊखेड़ा में दो माह से रहकर ग्राम अमऊखेड़ा निवासी हरीराम यादव एवं चुन्नी कुशवाहा के खेतों की रखवाली करती थी। हरीराम के खेत की रखवाली करने पर चार बोरा और चुन्नी केे खेतों से कुल तीन बोरा यानि कुल सात बोरा अनाज मेहनताने के तौर पर मिल जाता था। इसके अलावा कटाई के समय भी कुछ अलग से मजदूरी मिलती है। सीमा के पति हरीशंकर की दो वर्ष पहले बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। उसके देवर और देवरानी की भी काफी पहले बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। देवरानी का एक पुत्र है, जो उसकी सास फूलाबाई के साथ अलग झोपड़ी में रहता है। सीमा की ननद का परिवार भी ग्राम अमऊखेड़ा में उसकी झोपड़ी से कुछ दूर अलग झोपड़ी बनाकर दूसरे के खेतों की रखवाली करता है। सीमा और उसके बच्चों का न तो आधार कार्ड ही बनवाया गया है और न ही कोई खाता ही खुला है और न ही उसका कोई वोटर कार्ड ही है। हालांकि उसकी सास का आधार कार्ड व वोटरकार्ड उसके पुराने गांव का ही बना है। पूर्व प्रधान ग्राम धौर्रा रामेश्वर प्रसाद मिश्रा ने भाई-बहन की मौत के मामले में जिला प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिजनों को उचित सहायता राशि दी जाए।
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आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार को खुद के गांव में भी नहीं मिला सहारा
पीड़िता सीमा का परिवार लगभग 12 वर्ष पहले तक अपने स्थानीय गांव ग्राम मादौन के मजरा माताखेड़ा में खुद के दो कमरों के मकान में रहते थे। उसकी सास फूलाबाई के नाम पर करीब डेढ़ एकड़ जमीन भी है, जिस पर गांव में ही कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। इसे लेकर गांव वालों से कुछ विवाद होने पर पूरे परिवार को गांव छोड़कर भागना पड़ा था। इसके बाद यह लोग धौर्रा में श्रीरणछोरजी मंदिर मार्ग पर सरकारी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रहने लगे थे। इन्हें जब खेतों की रखवाली का काम मिलता है तो परिवार उन खेतों में जाकर वहीं झोपड़ी बनाकर रहता है और फसल पूरी होने पर वापस धौर्रा में अपनी झोपड़ियों में रहने लगता है। हालांकि पति और देवर की मौत के बाद सास के नाम जमीन होने पर किसान सम्मान निधि से सास को दो हजार रुपये भी मिलता है। गांव में मकान भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया : पीड़ित महिला सीमा के नंदेऊ जमुना ने बताया कि सीमा के पुस्तैनी गांव ग्राम मादौन के मजरा माताखेड़ा में कई वर्ष पूर्व किसी सरकारी योजना में आवास बनवाया गया था, जिसमें उसकी दीवारें तो पक्की बनवाई गईं, लेकिन छत के नाम पर इमारती पत्थरों का छप्पर बना दिया गया।
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परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत
ललितपुर। ग्राम अमऊखेड़ा में झोपड़ी में जलकर दो मासूमों की मौत के मामले में जिला प्रशासन द्वारा शासन द्वारा दी जाने वाली अनुमन्य आर्थिक सहायता के रूप में चार-चार लाख रुपये यानि कुल आठ लाख रुपये की मदद स्वीकृत कर दी गई है। इसके साथ ही पीड़ित परिजनों को जिला प्रशासन की ओर से खाने-पीने आवश्यक सामान भी मुहैया कराया गया।
ग्राम अमऊखेड़ा में झोपड़ी में दो बच्चों के जलने से मौत की घटना काफी दुखद है। पीड़ित परिवार को शासन द्वारा सभी प्रकार की अनुमन्य सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
अन्नावि दिनेश कुमार, जिलाधिकारी, ललितपुर।
घटनास्थल पर बैठे राजस्व कर्मी व ग्रामीण- फोटो : LALITPUR