- ड्रोन कैमरों से हो रही प्रवासी पक्षियों की निगरानी
- मेहमान पक्षियों ने बांधों, नदियों और तालाबों के आसपास डाला डेरा
- मेहमानों के आने से ललितपुर का प्राकृतिक साैंदर्य निखरा
- प्रजनन के लिए अनुकूल है जनपद का वातावरण
फोटो- 01
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। सर्द हवा के साथ जनपद के जलाशयों में साइबेरियन परिंदों का आगमन शुरू हो गया है। ये परिंदे हजारों किलोमीटर की दूरी तयकर पहुंचे हैं। जलाशयों पर इन पक्षियों की चहचहाहट से रौनक बढ़ गई है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार कड़कड़ाती ठंड से बचने और अनुकूल वातावरण की तलाश में परिंदों का समूह यहां आया है। ड्रोन कैमरों से इनकी निगरानी हो रही हैं। वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों से इन मेहमान पक्षियों की सुरक्षा की अपील की है।
बताया जाता है कि ये पक्षी अपना कुनबा बढ़ाने के लिए समूह में यहां आते हैं। चार महीने रहने के बाद 15 मार्च तक अपने बच्चों को वापस लेकर अपने-अपने देशों की ओर रुख कर लेते हैं। हालांकि अभी पक्षियों की संख्या कम है लेकिन जल्द ही इनकी संख्या में बढ़ोतरी होगी। सर्दी बढ़ते ही यूरोप, साइबेरिया, कजाकिस्तान, मंगोल समेत अन्य देशों में तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है। इस वजह से वहां के पक्षी दूसरे देशों की तरफ रुख करते हैं। जनपद का मौसम पक्षियों के अनुकूल होने की वजह से प्रवासी पक्षी यहां पर आते हैं। ये पक्षी राजघाट, माताटीला, गोविंद सागर, शहजाद, सजनाम, जामनी, रोहिणी आदि बांध के अलावा बेतवा, धसान, जामनी, शहजाद, सजनाम, नारायणी, सोंर आदि नदियों के आसपास डेरा डालते हैं। पर्यावरण प्रेमी बताते हैं कि प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी जल स्रोतों की सेहत और पारिस्थितिक संतुलन का संकेत होती है। प्रवासी पक्षियों के आगमन से ललितपुर का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर आया है।
इन प्रजातियों के पक्षी आते हैं
प्रमुख रूप से नीलसर, कामन टूथ पिंटेल, सलही, वारनकटा, धारोंदर सवन, ठेकरी, पन कौवा, पनडुब्बी चमचा, सिलही, रिनघुर, कालासिर, बाजा, जल पीपी, सिहो, जांघिल और घीमा आदि पक्षी शामिल हैं। वहीं, साइबेरियन क्रेन, ब्लैक हैडिड गूल, सिलिंडर हेडिड गूल, पुस्पेड डक, पोचार्ड, गूज व विजिटिंग डक सहित कई पक्षी लंबी उड़ान भरते हुए आते हैं।
शिकार पर तीन साल तक सजा का प्रावधान
इन पक्षियों के शिकार को लेकर सजा का प्रावधान है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इन पक्षियों के शिकार करने पर वन्य जीव अधिनियम की धाराओं में मामला पंजीकृत होता है। साथ ही तीन साल तक सजा का प्रावधान है। साथ ही विभागीय अधिकारी भी लोगों को इन पक्षियों की सुरक्षा के लिए जागरूक कर रहा है।
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साइबेरियन पक्षी जलाशयों में आना प्रारंभ हो गए हैं। सर्दी बढ़ते ही संख्या बढ़ेगी। इनकी सुरक्षा के लिए जलाशयों के आसपास ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। इनकी सुरक्षा और निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
- गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी