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सीएचसी तालबेहट में चिकित्सकाें का अभाव

Sun, 05 Jul 2015 11:51 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला
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सीएचसी तालबेहट में चिकित्सकाें का अभाव
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कभी भी ठप हो सकती है आपातकालीन सेवाएं
तालबेहट (ललितपुर)। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले कुछ दिनों से चिकित्सकों का भारी अभाव दिख रहा है। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों ने यदि समय रहते चिकित्सकों की कमी पर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में कभी भी यहां की आपातकालीन सेवाएं ठप हो सकती हैं।
क्षेत्र की जनता को बेहतर लाभ मुहैया कराने के लिए नगर में 30 पलंगों की सुविधा वाले सीएचसी का निर्माण कराया गया। बाद में लोगों के उपचार के लिए इसे आधुनिक मशीनाें से सजाया गया। इस समय आपातकालीन सेवाएं देने वाले चिकित्सकों की भारी कमी है। वर्तमान में यहां कार्यरत चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके सोनी, शिशु और बाल रोग विशेषज्ञ डा. कैलाश बाबू, डा. अनुराग बजाज और डा. सौरभ सक्सेना एवं वरिष्ठ दंत चिकित्सक डा. घनश्याम दास है। विभागीय नियमों के मुताबिक डा. घनश्याम दास आपातकालीन सेवाओं के लिए वैध नहीं है। वहीं, डा. सौरभ सक्सेना को विभागीय अधिकारियों ने कुछ माह के लिए ट्रेनिंग पर भेज दिया है। ऐसी स्थिति में चिकित्सा अधीक्षक को मिलाकर मात्र तीन चिकित्सक शेष बचते हैं। चिकित्सा अधीक्षक विभागीय बैठकों के अलावा सरकार द्वारा क्षेत्र में चलाए जा रहे कार्यक्रमाें के सिलसिले में अधिकतर जिला मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं। ऐसी स्थिति में मात्र दो चिकित्सक ही यहां दैनिक मरीजों की देखरेख और आपात कालीन सेवा के लिए है।
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जिन्हें सुबह प्रतिदिन सीएचसी आने वाले लगभग तीन सैकड़ा से अधिक मरीजों के  उपचार, पुलिस द्वारा भेजें गए अपराधियों का मेडिकल करने के अलावा बाद में आपातकालीन सेवाए देना होगी। एक चिकित्सक के लिए एक साथ इतने काम करना किसी भी दशा में संभव नहीं है।  इससे यहां कार्यरत चिकित्सकों में काफी रोष व्याप्त है। चिकित्सक छुट्टी लेने के मूड में दिखाई दे रहे हैं। वही चिकित्सा अधीक्षक अपनी परेशान जता कर उनसे कार्य करने की बात कह रहे हैं। स्थिति कुछ भी हो यदि विभागीय अधिकारियों ने शीघ्र ही चिकित्सकों की कमी पर ध्यान देते हुए यहां और चिकित्सकों को तैनात नहीं किया तो आने वाले समय में यहां की आपातकालीन सेवाएं ठप हो सकती है।
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एनआरसी केंद्र में भर्ती बच्चों का क्या होगा ?
तालबेहट (ललितपुर)। चिकित्सकों की कमी और उनके ऊपर डाले जा रहे अतिरिक्त भार के चलते सबसे अधिक प्रभाव सीएचसी में चल रहे कुपोषण एवं पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों का होगा। जहां रात में कई बार चिकित्सकाें के  परामर्श की आवश्यकता महसूस होती है।
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