झांसी। शिवांगी यादव की मौत के बाद उसके जेठ रविंद्र का कहना है कि शिवांगी की कोशिश के बाद पुष्पेंद्र एनकांउटर मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। आरोपी इंस्पेक्टर धर्मेद्र सिंह चौहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन, इसके बाद परिवार पर समझौता कर लेने का दबाव बनाया जा रहा था। धमकी देते हुए ससुराल एवं मायके के लोगों को फंसाने की धमकी दी जाती थी।
शिवांगी की मौत के बाद घर पहुंचे रविंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद शिवांगी के छोटे भाई को चोरी के आरोप में जेल भेज दिया गया जबकि पूरा मामला फर्जी था। पुलिस डराने के लिए यह कोशिश कर रही थी। जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई लेकिन, वह भी जांच आगे नहीं बढ़ा रही थी। घर के बाहर नोटिस चस्पा करके लौट जाते थे। बयान दर्ज कराने के लिए कानपुर बुलाते थे। इन सभी बातों से शिवांगी परेशान हो गई थी। उसने अपनी परेशानी कई बार परिवार के लोगों को बताई। वह लोग उसे ढांढस बंधाते थे। आखिरकार शिवांगी का सब्र खत्म हो गया और उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। शिवांगी का ससुराल करगुवां खुर्द में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था।