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सुख देने वाला है शीलव्रत : मुनि अक्षयसागर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मड़ावरा (ललितपुर)। वर्णीनगर में मुनि अक्षयसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण महापर्व के पूर्व सोलहकरण के तृतीय दिन भक्तों ने सोलह अर्घ्य समर्पित किए।
प्रातःकाल समवशरण के सौधर्म इंद्र बनकर प्रभु का पूजन करने, आचार्य श्रेष्ठ के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य अजय जैन, सीमा जैन परिवार ने प्राप्त किया। श्रीजी की शांतिधारा करने एवं चारों दिशाओं के इंद्र बनकर पूजन करने का सौभाग्य वीरेंद्र कुमार, वर्षा सिंघई, संदीप कुमार, सुषमा सेठ, बंटी, पिंकी बजाज, पं.गजेंद्र सौंरया, रत्नेश, पिंकी वैद्य परिवार ने प्राप्त किया। सोलहकारण विधान पूजन शीलव्रत की महिमा बताते हुए मुनि अक्षयसागर महाराज ने कहा कि शील सदैव सुख का कारक है। शील के बराबर संसार में दूसरा व्रत नहीं। दृढ़ता के साथ इसका पालन करना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पांच व्रत में मात्र शीलव्रत के पालन से रावण का कल्याण हुआ। संचालन विधानाचार्य राजेश जैन, संघस्थ बाल ब्रह्मचारी जयवर्मा, पं. संतोष शास्त्री ने किया। धर्मेंद्र सराफ, सरल जैन ने संगीत प्रस्तुत किया। वर्षा योग समिति के संरक्षक डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि चातुर्मास एवं पर्यूषण पर्व में बाहर से आने वाले भक्तों के लिए समिति की ओर से नि:शुल्क आवास, भोजन आदि की व्यवस्था की गई है। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष अभिनंदन चौधरी, महामंत्री राजेश सौंरया, कोषाध्यक्ष सुरेंद्र, शैलेंद्र वैद्य, रवि, सहसंयोजक नीलेश, उपाध्यक्ष राजू सेठी, हनी जैन, रानू, अभिषेक आदि मौजूद रहे।
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