राजकीय/सहायता प्राप्त विद्यालयों के शैक्षिक प्रदर्शन में सुधार लाने के मकसद से मूल्यांकन कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया गया है। शासन ने शालासिद्धि कार्यक्रम का नाम दिया गया है। जिसे धरातल पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है।
राजकीय/सहायता प्राप्त विद्यालयों में शैक्षिक स्थिति किसी से छिपी नहीं है। तमाम कालेजों में छात्र/छात्राएं पूरे समय कक्षाओं में नहीं बैठते हैं। कमोवेश यही स्थिति शिक्षकों की है। विभिन्न कालेजों में कई शिक्षक-शिक्षण कार्य से परहेज करते हैँ। इसका परिणाम यह है कि अधिकतर कालेजों का प्रदर्शन सुधरने की जगह बिगड़ रहा है। इसके मद्देनजर शासन ने शालासिद्धि कार्यक्रम के नाम से मूल्यांकन कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। वर्ष 2017-18 में इस कार्यक्रम को लागू किया जाना है। जिसे मूर्त रूप देने की तैयारी की जा रही है। बीते माह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अभियान के अपर राज्य परियोजना निदेशक सुत्ता सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखा है।
इसमें कहा गया कि मूल्यांकन के लिए एक साफ्टवेयर तैयार कराया गया है। इसका निर्माण न्यूपा नई दिल्ली ने किया है। इस साफ्टवेयर से विद्यालयों का मूल्यांकन किया जा सकता है। यह विद्यालयों के प्रदर्शन को सुधारने में सहायक सिद्ध होगा। उधर, जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने इस कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जीजीआईसी की प्रधानाचार्य पूनम मलिक को नोडल अधिकारी बनाया है।
रस्म अदायगी साबित हो रहा मौजूदा मूल्यांकन
इस समय राजकीय हाईस्कूल/इंटर कालेजो में संचालित आंतरिक मूल्यांकन कार्यक्रम से तनिक भी सुधार नहीं हुआ है। कालेजों के प्रधानाचार्य आनलाइन आंतरिक मूल्यांकन में औपचारिकता निभाते दिखाई दे रहे हैं। इससे कालेजों की वास्तविक स्थिति शासन तक नहीं पहुंच पा रही है। इस कार्यक्रम में विषयवार हुए शिक्षण का विवरण भरना होता है। शासन में बैठे अफसरों ने इस मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक से नाराजी भी प्रकट की थी। इसके बाद भी तमाम कालेजों के प्रधानाचार्य मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं।
स्कूल के मुख्य गेट पर फैल रही गंदगी
कन्या प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरायपुरा में अध्ययनरत बच्चों को मुख्य गेट पर फैल रही गंदगी परेशानी का सबब बन गई है। न केवल गंदगी से दुर्गंध उठ रही है, बल्कि बच्चों को आने जाने में भी तकलीफ हो रही है। इसके बाद भी विभागीय अफसर अनजान बने हुए हैं।
देश को साफ सुथरा बनाने के मकसद से स्वच्छ भारत मिशन चलाया जा रहा है। वहीं, स्कूलों को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना संचालित की जा रही है। इस योजना में कई विद्यालय चयनित हो चुके हैं। इसके बाद नगर क्षेत्र के विद्यालयों में स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका उदाहरण कन्या प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरायपुरा है। दोनों स्कूल एक ही कैंपस में संचालित हैं। जिसके मुख्य गेट पर गंदगी फैल रही है। इसकी वजह साफ है कि स्कूल की चहारदीवारी से सटकर मूत्रालय बनाया गया है। इस मूत्रालय से गंदगी यहां वहां बहकर स्कूल के मुख्य गेट पर पहुंच रही है।
इससे बच्चों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है। उधर, सब्जी की दुकान लगाने वाली महिलाएं भी परेशान हैं। उनका कहना है कि यहां रेडीमेड मूत्रालय रखवा गया है। उससे निकलने वाली गंदगी के लिए नाली का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। जिस कारण सब्जी की दुकान लगाने में काफी दिक्कत होती है। आसपास फैल रही गंदगी की दुर्गंध से सिरदर्द करने लगता है। इस समस्या के समाधान के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किए गए हैं। उधर, खंड शिक्षा अधिकारी नगर आभा अग्रवाल का कहना है कि मूत्रालय से उपजी समस्या के निदान के लिए नगर पालिका परिषद को अध्यक्ष पत्र लिखा जाएगा।