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Lalitpur News: कर्नाटक में बंधक बनाए गए 17 मजदूर मुक्त, दो अब भी लापता

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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नागपुर में मजदूरी दिलाने का झांसा देकर ले जाए गए मड़ावरा क्षेत्र के 17 मजदूरों को परिवार सहित कर्नाटक में बंधक बनाकर गन्ना कटाई कराई जा रही थी। तीन महीने तक अमानवीय हालात में रखे गए मजदूरों को जिला प्रशासन की पहल पर कर्नाटक के बागलकोट से मुक्त करा लिया गया है। हालांकि, इसी गिरोह के चंगुल में फंसे दो मजदूर अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
ग्राम पापड़ा और सौल्दा के ये मजदूर दीपावली के बाद बच्चों समेत नागपुर गए थे। सागर और सलमपुर निवासी दो ठेकेदार उन्हें गन्ना कटाई की मजदूरी का भरोसा दिलाकर ले गए। पहले ट्रैक्टर और पिकअप, फिर ट्रक से मजदूरों को नागपुर पहुंचाया गया। इसके बाद रात में ट्रक से महाराष्ट्र के चंडी ले जाकर 15 दिन तक कपास तुड़वाई गई। इसके बाद गन्ना कटाई का बहाना बनाकर मजदूरों को कर्नाटक ले जाया गया, जहां उन्हें बंधक बनाकर रखा गया।
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मजदूरों ने बताया कि उनसे सुबह से रात तक काम कराया गया, लेकिन खाने, पीने और नहाने तक के लिए तरसाया गया। मजदूरी मांगने पर मारपीट की जाती थी। किसी तरह 29 दिसंबर को मजदूर राजकुमार ने मोबाइल से घर संपर्क कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद ग्राम सौल्दा निवासी गोरेलाल की पत्नी वती ने जिलाधिकारी सत्यप्रकाश को शिकायत दी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने कर्नाटक के बागलकोट जिला प्रशासन से संपर्क किया। जनसाहस स्वयंसेवी संस्था की टीम एक जनवरी को कर्नाटक पहुंची और तीन जनवरी को कर्नाटक प्रशासन के सहयोग से सभी 17 मजदूरों व उनके बच्चों को मुक्त कराया गया। मजदूरों ने यह भी बताया कि ग्राम गौंठरा के चार अन्य लोग भी मजदूरी के लिए गए थे, जिनमें से दो वापस लौट आए हैं, जबकि दो मजदूरों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है।


चार लाख में बेचे गए मजदूर

ग्राम पापड़ा निवासी मजदूर जीवन ने बताया कि ठेकेदारों ने 500 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी का लालच दिया था, लेकिन कर्नाटक पहुंचते ही उन्हें चार लाख रुपये में अशोक मुंडा नामक व्यक्ति को बेच दिया गया। सप्ताह में महज 250 रुपये और एक परिवार को पांच किलो आटा, थोड़ी सब्जी व तेल दिया जाता था। मजदूरी मांगने पर मारपीट की जाती और खरीदे जाने की बात कहकर डराया जाता था।

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प्रशासन ने शुरू किया पुनर्वास

मुक्त कराए गए सभी मजदूरों को ललितपुर लाकर डायट के सामने स्थित सेंटर होम में ठहराया गया है। प्रशासन ने उनके भोजन और रहने की व्यवस्था की है। साथ ही जॉब कार्ड, पेंशन और रोजगार से जुड़ी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।



अधिकारी का बयान

कर्नाटक के गदग और बागलकोट में मजदूरों के बंधक होने की शिकायत मिली थी। बागलकोट के जिलाधिकारी से संपर्क कर मजदूरों को मुक्त कराया गया है। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है और मजदूरों के दस्तावेज बनवाकर जॉब कार्ड व पेंशन दिलाई जाएगी।

– मदन मोहन गुप्ता, उपजिलाधिकारी न्यायिक, तालबेहट

मुक्त कराए गए मजदूरों को प्रशासन देगा आर्थिक संबल
ललितपुर। कर्नाटक में बंधक बनाए गए 17 मजदूरों को मुक्त कराने के बाद अब जिला प्रशासन उनके पुनर्वास और आर्थिक सहायता की दिशा में कदम उठा रहा है। श्रम विभाग द्वारा सभी श्रमिकों को तत्काल राहत के रूप में आर्थिक मदद देने की तैयारी की गई है।
श्रम प्रवर्तन अधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि बंधक मजदूरों के अवमुक्त प्रमाणपत्र प्राप्त होते ही कार्पस निधि खाते से प्रति श्रमिक 30 हजार रुपये की तत्काल सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही सभी मजदूरों का ई-श्रम कार्ड और श्रमिक पंजीयन कराया जाएगा, ताकि वे शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
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वहीं, बाल मजदूरों के संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी नंदलाल ने बताया कि जैसे ही ऑनलाइन प्रार्थना पत्र प्राप्त होगा, संबंधित बच्चों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं से आच्छादित किया जाएगा। इससे उनकी शिक्षा, संरक्षण और भविष्य की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी। संवाद
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