संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में जूनियर चिकित्सकों की कमी से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इमरजेंसी, ओपीडी, वार्ड समेत अन्य स्थानों पर चिकित्सकों का टोटा हो गया है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 45 जेआर नियुक्त हो गए हैं, जल्द ही तैनात कर सेवाएं सुचारू की जाएंगी।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों के बेहतर उपचार के जूनियर चिकित्सकों की नियुक्ति की जाती है। मेडिकल कॉलेज में इन चिकित्सकों के 86 पद स्वीकृत हैं। अब तक मेडिकल कॉलेज में जूनियर रेजीडेंट सेवाएं दे रहे थे। इनमें कई जेआर डॉक्टरों का अनुबंध समाप्त हो गया था। वहीं कुछ चिकित्सकों का पीजी में सिलेक्शन हो गया था। अनुबंध समाप्त होने के चलते मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 35 जेआर को हटा दिया गया। वहीं नए चिकित्सक अब तक आए नहीं हैं।
चिकित्सकों की कमी होने के चलते मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर इमरजेंसी से लेकर वार्ड और ओपीडी तक में चिकित्सकों की कमी हो गई है। ऐसे में वार्ड में चिकित्सक स्थायी रूप से नहीं रह पा रहे हैं। इसके चलते स्वास्थ्य सेवाएं तक प्रभावित बनी हुई हैं। वहीं सीनियर रेजीडेंट व अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों पर भार बढ़ गया है। ऐसे में मरीजों को कई बार उपचार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि 45 जेआर आ गए हैं, जल्द ही जिनके विभाग तय कर सेवाएं शुरू की जाएंगी।
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मेडिकल कॉलेज में है 86 जेआर के स्वीकृत पद
मेडिकल कॉलेज में मरीजाें को बेहतर उपचार की सुविधाएं देने के लिए एमबीबीएस उत्तीर्ण करने वाले जेआर चिकित्सकों को दो वर्षों के अनुबंध पर तैनात किया जाता है। यहां पर 86 जेआर के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष अब तक 32 जेआर सेवाएं दे रहे थे। 54 पद रिक्त बने हुए थे। अब इन 32 जेआर का अनुबंध समाप्त होने पर हटा दिया है। 45 नए जेआर आ गए हैं। हालांकि इन्हें अभी विभाग आवंटित नहीं किए गए हैं। हालांकि 41 पद अब भी रिक्त बने हुए हैं।
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मेडिकल कॉलेज में कार्यरत जेआर का अनुबंध समाप्त होने पर सेवाएं समाप्त की गई है। नए जेआर आ गए हैं। जल्द ही विभाग देकर सेवाएं ली जाएंगी।
- डॉ. विशाल जैन, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज