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विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त

Mon, 28 Sep 2015 12:34 AM IST
ब्यूरो ललितपुर।
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ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों की प्रबंध समितियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी बीएसए कार्यालय को अब तक नए दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हो सके हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शासन ने अब तक न तो नए चुनाव कराने की घोषणा की है और न ही प्रबंध समितियों के कार्यकाल को बढ़ाने के संबंध में पत्राचार किया है। 
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नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक विद्यालय में प्रबंध समिति का गठन किया जाता है। विद्यालय प्रबंध समिति के चयनित सदस्यों में से एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष का चुना जाता है। समिति में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी होना आवश्यक है। यही नहीं, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष में से एक महिला होना अनिवार्य है। विद्यालय प्रबंध समिति के चुनाव में कोरम पूरा होना होना आवश्यक है, जिसमें विद्यालय के कुल बच्चों की संख्या में से 50 प्रतिशत बच्चों के माता-पिता और संरक्षक की उपस्थिति होना आवश्यक है। कोरम के अभाव में चुनाव को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। समिति का कार्यकाल दो वर्ष होता है।

वर्ष 2013 के सितंबर माह की 13 तारीख को विद्यालय प्रबंध समितियों का गठन किया गया था। इस हिसाब से समिति का दो वर्षीय कार्यकाल समाप्त हो गया है। लेकिन, शासन ने नये चुनाव की अभी तक सुध नहीं ली है, जिससे प्रबंध समिति की बैठकें भी प्रभावित होने लगी हैं। इस संबंध में विभागीय अफसर कुछ भी स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं। हालांकि, सदस्यों की संख्या कम करने पर विचार मंथन चल रहा है।
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सूत्र बताते हैं कि विद्यालय प्रबंध समितियों का कार्यकाल आगे बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं, लखनऊ स्तर पर समिति के सदस्यों की संख्या कम करने पर भी विचार चल रहा है। शायद यही वजह है कि उच्च अधिकारी प्रबंध समिति के चुनाव पर मौन बने हुए हैं। आने वाले दिनों में तस्वीर साफ होने की संभावना है।
यह नहीं हो सकते सदस्य विद्यालय  प्रबंध समिति में शिक्षामित्र, रसोइया और शिक्षा विभाग में कार्यरत व्यक्तियों को सदस्य नहीं बनाया जाता है। इसमें केवल विद्यालय का  प्रधानाध्यापक सदस्य सचिव ही रखा जाता है।
समिति को हैं वित्तीय अधिकार प्रबंध समिति के अध्यक्ष व सचिव प्रधानाध्यापक के नाम बैंक में संयुक्त खाता होता है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं का पैसा खर्च किया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से यूनिफार्म की धनराशि आदि शामिल है।
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