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छाया रहा छात्रवृत्ति का गड़बड़झाला

Thu, 17 Dec 2015 12:29 AM IST
ब्यूरो
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ललितपुर। बुधवार को प्रमुख सचिव समाज कल्याण सुनील कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में छात्रवृत्ति की समीक्षा करते हुए अपात्रों को लाभ मिलने की दशा में जिम्मेेदार अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी।
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उन्होंने तय समयावधि में छात्रवृत्ति, समाजवादी पेंशन सहित अन्य योजनाओं का काम पूरा करने के भी निर्देश दिए।

स्कूल व कालेजों में छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिसमें पूर्व दशम छात्रवृत्ति में कक्षा दस तक के बच्चों को सम्मलित किया जाता है तो दशमोत्तर छात्रवृत्ति में कक्षा ग्यारह से स्नातक के छात्रों को नामांकित करने का प्रावधान है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में छात्रवृत्ति की आनलाइन प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिसमें बड़ा गड़बड़झाला उभरकर आया है।

जिले में 2,332 विद्यार्थियों का रिकार्ड नहीं मिल रहा है। वहीं, गत वर्ष के पंजीकृत अधिकतर छात्रों के फार्म अग्रसारित नहीं हुए हैं, जिससे छात्रवृत्ति का डाटा मिस मैच हो गया है। अन्य जिलों में भी स्थिति खराब है। इसके मद्देनजर प्रमुख सचिव ने जिला समाज कल्याण अधिकारी, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और पिछड़ा कल्याण अधिकारी से छात्रवृत्ति की तैयारियों को जाना।
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उन्होंने कहा कि दशमोत्तर छात्रवृत्ति का डेटा सही नहीं है। गत वर्ष के सापेक्ष इस साल छात्रों के अग्रसारित फार्मों की संख्या काफी कम है। वेबसाइट पर अग्रसारण के दौरान विकल्प दिए गए थे, उसे संस्थाओं ने भरने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। न तो यह दर्शाया गया कि कितने छात्र पढाई छोड़ चुके हैं या बाहर चले गए हैं या फिर आय, जाति प्रमाण पत्र के अभाव में अग्रसारित नहीं हो सके हैं।

इसके विपरीत नवीन फार्मों की संख्या अचानक बढ़ गई है। प्रदेश की 12 हजार संस्थाओं ने ऐसा किया है। उन्होंने सक्सपेक्ट डेटा का वेरीफिकेशन कराने के निर्देश दिए। यदि छात्रवृत्ति का पैसा गलत छात्र के खाते में चला गया तो संस्था के प्रधानाचार्य, प्रबंधक व जिम्मेदार अफसर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने समाजवादी पेंशन के बारे में कहा कि लक्ष्य को पूरा करते हुए पात्रों का योजना का लाभ पहुंचाएं। ब्लाक स्तर पर रिजेक्ट फार्म का सत्यापन कर उन्हें वेबसाइट पर अपलोड कराए। उन्होंने पारिवारिक लाभ योजना को आनलाइन करने के निर्देश दिए। इस दौरान अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण के निदेशक भी उपस्थित रहे।
 
यह कारण है मिसमैच डेटा का
छात्रवृत्ति फार्म को भरते समय यूपी बोर्ड का पंजीयन नंबर भरना था। लेकिन, उस दौरान विद्यालयों के पास पंजीयन नंबर नहीं थे, जिस कारण छात्रों ने एसआर नंबर भर दिया। इससे डेटा मिसमैच हो गया। अब यह विभाग के मुसीबत बन गया है।
पलायन कर जाते हैं छात्र
जिले में अच्छी शैक्षिक संस्थाओं व प्रोफेशनल कोर्सों का अभाव है, जिस कारण से बड़ी संख्या में छात्र महानगरों की ओर पलायन कर जाते हैं। कई छात्र-छात्राओं ने कालेजों में प्रवेश लिया। लेकिन, मौका पाकर वह दिल्ली, इंदौर, सागर और भोपाल चले जाते हैं। स्थानीय स्तर पर विभागीय अफसर इसे लिखित तौर स्वीकार नहीं करते हैं, जो आज गले की फांस बनता जा रहा है।
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