शहर में शहजाद नदी और बयाना नाले के संकरे पुल होने की वजह से आए दिन आठ से दस बार वाहनों का लंबा जाम लगता है। जिसकी वजह से लोगों को अक्सर परेशानी का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक समस्या छात्रों व मरीजों को होती है। उधर जानकारी होने के बाद भी जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन इस समस्या से बेपरवाह बने हुए है। पुलों को चौड़ा करने का काम सर्वे तक ही सीमित रह गया है।
शहर में 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद आज भी शहरवासी आजादी के पहले के बनाए गए पुलों पर चलने को ही मजबूर हैं। शहर में नदीपुरा मोहल्ले से निकली शहजाद नदी पर जब पुल बनाया गया था, उस समय यहां की आबादी हजारों में हुआ करती थी। शहर पुराने मोहल्लों व घंटाघर से आजाद चौक, नदीपुरा और तुवन चौराहा तक ही सीमित हुआ करता था। जबकि तुवन चौराहा से लेकर रेलवे स्टेशन तक आबादी क्षेत्र बहुत बाद में विस्तार हुआ। धीरे-धीरे शहर की आबादी बढ़ने के साथ मोहल्लों व प्रतिष्ठानों का विस्तार भी होता चला गया। आज शहर की आबादी लाखों में पहुंच गई, लेकिन आज शहजाद नदी और बयाना नाला के पुलों की न तो चौड़ाई बढ़ाई गई और न ही उनकी ऊंचाई।
शहर के कई संगठनों द्वारा वर्षों से इन दोनों नदी व नाले के पुलों को चौड़ा करने के लिए आंदोलन भी किए जा रहे हैं। हालांकि शहर में दोनों पुलों को बनाने के लिए सर्वे तो करा लिया गया है, लेकिन यह काम कभी सर्वे से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। संकरे पुलों पर कई बार वाहनों की संख्या अधिक हो जाने पर लंबे जाम की स्थिति बन जाती है। जो स्कूली बच्चों, मरीजों व आवश्यक कार्य से जाने वाले लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है।
बारिश में बढ़ जाता पानी
भले ही इस बार बहुत अधिक बारिश नहीं होने के कारण नदी व नाले के पुलों पर पानी बढ़ने की समस्या न आई हो, लेकिन जब बहुत तेज बारिश में बांध के गेट खुलने के दौरान नदी के पुल से कई फुट ऊंचाई पर पानी बहने लगता है। ऐसे में शहरवासियों के लिए पुल के माध्यम से दूसरी ओर जाना काफी कष्टदायी साबित होता है। जबकि बयाना नाले पर भी कई बार बारिश के दिनों में पानी पुल से कई फुट ऊपर बहने लगता है। जिससे यहां से वाहन निकलना मुश्किल हो जाता है। वहीं यह दोनों पुल संकरे होने के कारण कई बार पुलों से कई किलोमीटर तक जाम लग जाता है।
बोले विधायक
- शहजाद नदी और बयाना नाले पर पुल को नया बनाने के लिए सेतु निगत और लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा है। वहीं, रेलवे और राज्य की ओर से देवगढ़ रेलवे क्रॉसिंग पर रेल ओवर ब्रिज बनाने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, इसके लिए 33 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया गया, जिसकी स्वीकृति के लिए वित्त मंत्रालय को भेजा गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा बजट स्वीकृत होने पर इसी वर्ष से काम शुरू होने की संभावना है।
रामरतन कुशवाहा, सदर विधायक।