ललितपुर। बीते वर्ष मेडिकल कॉलेज में तैनात एक चिकित्सक शिकायत के बाद जांच में इंजीनियर निकला था। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने इंजीनियर पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। साथ ही वेतन रिकवरी की तैयारियां करते हुए मुख्यालय को पत्र लिखा था। लेकिन एक वर्ष बाद भी अब तक वेतन की रिकवरी नहीं हो सकी है। मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। हद तो तब हो गई, जब विभाग ने महज पत्र लिखकर इतिश्री कर ली है।
दस अगस्त 2025 को डॉ.सोनाली सिंह ने मेडिकल कॉलेज व जिलाधिकारी को मेडिकल कॉलेज के एनसीडी सेल में कार्डियोलाॅजिस्ट के पद पर कार्यरत चिकित्सक डॉ. राजीव गुप्ता की शिकायत की थी। इसमें उसने बताया था कि उसके पति डॉ.राजीव गुप्ता अमेरिका के एक अस्पताल में कार्यरत हैं। पति की डिग्री लगाकर एनएचएम के अंतर्गत कार्डियो एवं जनरल मेडिसिन के पद पर एक लाख रुपये प्रतिमाह पर तीन वर्ष से एनसीडी सेल में चिकित्सक बन नौकरी कर रहा व्यक्ति अभिनव सिंह है। मामले को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच में जुट गई। साथ ही जिलाधिकारी ने भी तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच कराई। जांच में चिकित्सक बने व्यक्ति की इंजीनियर अभिनव सिंह के रूप में पुष्टि हुई। इसके बाद फर्जी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की गई। साथ ही तीन वर्ष में प्राप्त किए वेतन की रिकवरी की तैयारियां शुरू कर दीं थी।
लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी अब तक स्वास्थ्य विभाग वेतन की रिकवरी नहीं कर सका है। ऐसे में चिकित्सक बनकर एनएचएम से 33 माह में ली गई 33 लाख की सरकारी धनराशि फंस कर रह गई है। हद तो तब हो गई जब विभाग ने महज मुख्यालय को एक बार पत्राचार किया। तब से अब तक कोई अन्य पत्राचार नहीं किया गया है। महज पत्राचार तक ही कार्रवाई सीमित होकर रह गई है। मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। ऐसे में विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
बीते वर्ष फर्जी चिकित्सक के मामले में वेतन की रिकवरी के लिए एनएचएम को पत्राचार किया गया था।- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ, ललितपुर