पुराने बस स्टैंड के पास सैकड़ों की संख्या में मजदूरों के खड़े हो जाने से यातायात व्यवस्था बाधित हो रही है। यहां हॉर्न बजाए बगैर कोई भी वाहन आसानी से निकल नहीं पाता है। कई बार तो जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे हर समय दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है। इसके बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिले में रोजगार की समस्या किसी से छिपी नहीं है। मनरेगा जैसी योजनाएं भी स्थानीय स्तर पर मजदूरों को रोजगार मुहैया नहीं करा पा रही है। जिस कारण प्रत्येक दिन शहर में सुबह से मजदूरों का मेला लग जाता है। पहले मजदूरों को खड़ा रहने के लिए अटा मंदिर के पास स्थान मुहैया कराया गया था, जिसे बाद में स्थान बदलकर पुराने बस स्टैंड कर दिया गया। इससे अटा मंदिर के पास भीड़ का दबाव कम हो गया, लेकिन अब पुराने बस स्टैंड में भी यही हालात बनने लगे हैं। यहां सैकड़ों की संख्या में मजदूर जगह-जगह खड़े हो जाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति मजदूर की तलाश में आता है, वैसे ही दर्जनों की संख्या में मजदूर उनके पास पहुंच जाते हैं।
कई बार तो ऐसा होता है कि जो व्यक्ति मजदूर को लेने के लिए आया है, उसे दो या तीन मजदूरों की आवश्यकता है, लेकिन उसके पास अच्छी खासी संख्या में मजदूर भीड़ लगा लेते हैं। कई मजदूर तो बीच सड़क पर ही खड़े हो जाते हैं, जिससे निकल रहे वाहनों का मार्ग बाधित हो जाता है। ऐसे में वाहन चालक हॉर्न बजाता रहता है, इसके बाद भी मजदूर हॉर्न की आवाज को नजरअंदाज कर देते हैं। कई तो सड़क के बीच बने डिवाइडर पर बैठकर रोजगार का इंतजार करते हैं। इस तरह के हालात आए दिन बन जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि मजदूरों के लिए पृथक से स्थान मुहैया करा दिया जाए तो सड़क पर यातायात व्यवस्थित हो जाएगा, साथ ही मजदूरों को पेयजल व शेड की सुविधा भी मिल सकेगी। जिस पर नगर पालिका ध्यान नहीं दे रही है।
......