ललितपुर। ग्रामीण इलाकों में सचिवालय बनाने की योजना जनपद में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। छह साल गुजर जाने के बाद भी सचिवालयों को निमार्ण पूर्ण नहीं हो सका। वहीं, कार्यदायी संस्था ने मिली-भगत करके अपूर्ण काम होने के बावजूद भी पूर्ण भुगतान निकाल लिया गया।
बीआरजीएफ योजना के अंतर्गत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 116 ग्रामीण सचिवालय बनाए जाने थे। जिसके लिए शासन ने जिला पंचायत को 18 करोड़ 12 लाख 89 हजार रूपये का आवंटन बर्ष 2010-11 में किया था। शासन द्वारा सचिवालय निर्माण करने की कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश श्रम एवं निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड (लैकफेड) एवं उत्तर प्रदेश विधायन एवं निर्माण संघ (पैक्सफेड) को बनाया था। योजना की शुरूआत से ही धांधली शुरू हो गई।
जिला पंचायत ललितपुर द्वारा नियम विरूद्ध एक ही किश्त में लैकफेड संस्था को 10 करोड़ 96 लाख रूपये दे दिया एवं पैक्सफेड संस्था को 8 करोड़ 11 लाख 93 हजार रूपये का आवंटन कर दिया। पूरे धन का आवंटन होने के बाद दोनो संस्थाओं ने मिलकर लगभग 16 करोड़ 78 लाख 93 हजार रुपये खर्च कर दिए। दिलचस्प बात है वर्ष 2010-2011 से शुरू हुई इस योजना के 6 वर्ष होने के बाद भी निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका। 116 ग्रामीण सचिवालयों में महज डेढ़ दर्जन सचिवालयों का निर्माण ही पूर्ण बताया गया है। बकाया सचिवालय के भवनों के निर्माण अभी भी अधूरी हालत में जर्जर हो रहे है।
मार्च 2016 की प्रगति रिपोर्ट में 90 प्रतिशत से ज्यादा कार्य दर्शाया गया एवं 90 प्रतिशत से ज्यादा धनराशि का खर्च का ब्यौरा दिया गया। कार्यदायी संस्थाओं द्वारा झूठी रिपोर्ट देने पर प्रशासन ने बिना कोई जांच किए उसे सच मान लिया है।
योजना एक स्टीमेट अलग-अलग
लैकफेड द्वारा जिला पंचायत को सौंपी गई मार्च 2016 की प्रगति रिपोर्ट में बनाए जा रहे 116 ग्रामीण सचिवालयों के खर्च का ब्यौरा दिया है, लेकिन सचिवालयों की वर्तमान स्थिति के बारे में कोई भी जिक्र नहीं किया है। वहीं, एक जैसे सचिवालयों के लिए दोनों संस्थाओं ने अलग-अलग स्टीमेट तैयार किए।
लैकफेड द्वारा बनाए जा रहे सचिवालय के निर्माण हेतु शासन से प्रति सचिवालय के लिए 14 लाख 72 हजार रुपये व पैक्सफेड द्वारा इन्हीं सचिवालय के निर्माण हेतु 16 लाख 57 हजार रुपया तय किया गया। दोनों कार्यदायी संस्था अपने सचिवालायों को जिला पंचायत को सौंपने को तैयार हैं, लेकिन सचिवालयों की खराब हालत देखते हुए जिला पंचायत इन सचिवालयों को अपने सुपुर्द लेने से मना कर दिया है।
इनका कहना है
सचिवालय निर्माण होने का कार्य पुराना है। जानकारी मिली है, कि सचिवालय सही तरीके से नहीं बनाए गए हैं। मामले की जांच कराई जाएगी।
डॉ. रूपेश कुमार जिलाधिकारी