ललितपुर। जिलाधिकारी डॉ रूपेश कुमार द्वारा की गई सख्ती का एआरटीओ कार्यालय में कोई असर नहीं दिखा। दलाल वहां फिर सक्रिय हो गए।
बुधवार को डीएम ने एआरटीओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान दो दलालों को पकड़कर उन पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन का अवकाश रहा। शुक्रवार से दलाल फिर से सक्रिय हो गए। अमर उजाला की टीम ने एआरटीओ कार्यालय में दलालों की उपस्थिति के बारे में जानकारी ली, तो पाया कि दलाल खुलेआम कार्यालय में लोगों के काम कराते नजर आए। एआरटीओ कार्यालय के बाहर दलालों की सारी दुकानें खुली रहीं।
कार्यालय में दलालों की सक्रियता को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सब अफसरों की मौन स्वीकृति के कारण चल रहा है। ज्ञातव्य हो कि जिलाधिकारी ने अपने निरीक्षण के बाद स्पष्ट तौर पर निर्देश दिए थे कि कार्यालय में दलालों की इंट्री बंद कराई जाए, लेकिन एआरटीओ कार्यालय में इन आदेशों का पालन एक दिन भी नहीं किया जा सका।
दलालों का जमा है बाजार
एआरटीओ कार्यालय में इंट्री करने से पहले आपको दलालों के बाजार से गुजरना पड़ेगा। कच्चे व पक्के निर्माण करके दलालों की दुकानों खुली हुई हैं। इन दलालों से मिले बिना कोई भी काम कराना एआरटीओ कार्यालय में मुमकिन नहीं है। अगर कोई गलती से सीधा कार्यालय में संपर्क करता है, तो उसे इतने पेच बता दिए जाते हैं कि आखिरकार उसको दलालों की ही शरण में जाना पड़ता है।
हर फाइल पर होता है कोड
एआरटीओ कार्यालय के अंदर पहुंचने वाली हर फाइल पर दलाल के नाम के पहले अक्षर का कोड होता है। किसी फाइल पर ए, तो किसी पर एस लिखा होता है। इस कोड से ही पता चलता है, कि ये किस दलाल की फाइल है और किस कमीशन पर काम होना है। बिना दलाल के फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया जा सकता है। अगर आपने दलाल से संपर्क कर लिया तो आप कार्यालय अपनी गाड़ी लाए बिना ही फिटनेस प्रमाण पत्र पा सकते हैं।