रबी की बुआई शुरू होते ही पानी के लिए मारामारी शुरू हो गई है। प्रभावशाली लोगों ने नहरों में आड़ा लगाकर पानी रोक लिया है, जिससे कई गांवों में हजारों एकड़ खेत सूखे पड़े हैं। पलेवा नहीं हो पा रहा है, जिससे किसानों में रोष है।
सिलावन क्षेत्र से सजनाम दाईं नहर और जामनी बाईं नहर निकली है। इन नहरों को फुल गेज पर चलाया जा रहा है, लेकिन फिर भी टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। प्रभावशाली लोगों ने कई स्थानों पर आड़ा लगाकर पानी रोक लिया है। यह लोग अपने खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। इस कारण सजनाम बांध से निकलने वाली दाईं नहर से सिंचित होने वाले टेल के अमौरा, सुकाड़ी, बारव, दरौनी, पाह आदि गांवों की हजारों एकड़ जमीन सूखी पड़ी हुई है। वहीं जामनी बाई नहर का पानी सतलिंगा, भौरट, खैरा, दिदौरा, ढंगरिया, उमरी, अजनौरा, टपरन, उदैया सहित बानपुर क्षेत्र के खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। इस कारण खेत सूखे पड़े हैं। पानी नहीं मिल पाने के कारण किसान पलेवा नहीं कर पा रहे हैं और बुआई का समय निकलता जा रहा हैं। इससे किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं।
किसानों का कहना है कि नहरों का संचालन हुए कई दिन निकल चुके हैं, बावजूद इसके आज तक पानी नहीं पहुंच पाया है। यदि समय से बुआई नहीं हुई तो क्षेत्र का किसान बर्बाद हो जाएगा। यह समस्या कई इसी वर्ष की नहीं है, हर वर्ष प्रभावशाली लोग आड़ा लगाकर पानी रोक लेते हैं, जिससे नहर की टेल के किसानों को पानी नहीं मिल पाता है। उनका कहना है कि अगर यही स्थिति रहती है तो आंदोलन के सिवाय और कोई रास्ता नहीं बचेगा।
सिंचाई अफसर नहीं कर रहे कोई कार्रवाई
कुरौरा गांव निवासी उमराव का कहना है कि आगे के गांव वाले किसान नहर के पानी को आड़ा लगाकर रोक लेते हैं, जिसके कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसकी शिकायत करने पर भी अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। नहरों की सफाई के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जाती है।
कई वर्षों से नहीं पहुंचा टेल तक पानी
अमौरा गांव निवासी किसान चुन्नीलाल बताते हैं कि यह समस्या आज की नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से चली आ रही है। सामोगर के बाद आगे के गांवों में नहरों का पानी नहीं पहुंच पाता जिसके चलते किसानों को खेती किसानी करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
किराए पर ले रहे पानी
किसान भगवान दास बताते हैं कि ऐसा नहीं हैं कि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है लेकिन उदासीनता के चलते किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।उन्हें अपने खेतों की सिंचाई करने के लिए तीन हजार फुट पाइप लाइन बिछाकर किराए से पानी ले जाना पड़ता है जिससे उनकी उपज की लागत कई गुना बढ़ जाती है।