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बजट नहीं, कैसे बनेंगी शहर की सड़कें

Fri, 17 Mar 2017 12:38 AM IST
lalitpur
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सड़क - फोटो : amar ujala
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शहर के मुख्य मार्गों पर सड़कें कम और गड्ढे ज्यादा हो गए हैं। इन सड़कों पर आवागमन वाहन चालकों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। करीब दो माह पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा उक्त सड़क के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यदाई संस्था को वर्कआडर भी जारी कर दिया था। इसके बाद उक्त सड़कों का निर्माण शुरू हो गया है। लेकिन अब बजट नहीं होने के कारण निर्माण कार्य बंद भी हो गया है।
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शहर सीमा के भीतर लोक निर्माण विभाग द्वारा करीब नौ-दस किलोमीटर लंबाई की सड़क डली हुई है। सबसे ज्यादा समस्या शहर वासियों को रेलवे स्टेशन मार्ग व गल्ला मंडी मार्ग पर होती है, यदि बाजार क्षेत्र से रेलवे स्टेशन तक के मार्ग की बात करें तो रेलवे स्टेशन जाने के लिए यह इकलौता मार्ग है और इसी मार्ग पर शहर के बड़े मंदिर जैन समाज का क्षेत्रपाल जी और श्रीतुवन मंदिर भी स्थित है, जहां लोगों का हर रोज भारी संख्या में आना-जाना होता है। इसके अलावा भी इसी मार्ग पर शहर के एक दर्जन से अधिक मुख्य बैंक भी स्थित हैं और कचहरी व कलक्ट्रेट तक पहुंचने के लिए भी इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है और सबसे बड़ी बात तो यह भी है कि इसी मार्ग पर लोक निर्माण विभाग का कार्यालय भी बना हुआ है। गौरतलब है कि घंटाघर परिसर से रेलवे स्टेशन वाला मार्ग देवगढ़ तक जाता है। इस संपूर्ण मार्ग निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा केंद्रीय रोड फंड से कराया जा रहा है।


करीब दो माह पूर्व विभाग द्वारा उक्त सड़क के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यदाई संस्था को वर्क ऑडर भी जारी कर दिया था। जिसके बाद से उक्त सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो गया है जो ग्रामीण क्षेत्र में कराया जा रहा है, लेकिन विभाग में बजट नहीं होने के कारण निर्माण कार्य बंद भी हो गया है। इसके अलावा शहर के मुख्य बाजार में स्थित वीर सावरकर चौक से नवीन गल्ला मंडी तक के मार्ग की बात करें तो इस मार्ग का भी काफी बुरा हाल है और यह मार्ग भी शहर का काफी व्यस्ततम मार्ग है। गल्ला मंडी आने-जाने वाले व्यापारी व किसान के साथ-साथ झांसी की ओर जाने वाले समसत छोट़-बड़े वाहन का परिवहन होता है। साथ ही सदरकांटा, इलाइट चौराहा व जेल चौराहा तक व्यवसायिक क्षेत्र होने के कारण इस मार्ग पर भी सुबह से देर रात तक वाहन दौड़ते रहते हैं। यह दोनों ही मार्ग वर्तमान में पूरी तरह से गड्ढों में तबदील हो चुके हैं। बीते बरसात के मौसम में लोगों को कीचड़ व गड्ढों में होने वाले जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा था और अब इन मार्गों पर हिचकोलों के साथ-साथ सड़कों पर उड़ने वाली घूल भी लोगों के लिए काफी बड़ी मुसीबत बन गई है। चाहे बजट का अभाव या फिर कोई अन्य बजह हो लेकिन परेशानी तो शहरवासियों को ही उठानी पड़ रही है।                  
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केंद्र से पास सड़कों के लिए नहीं मिला बजट                
विधानसभा 2017 के चुनाव शुरू होने के कुछ माह पूर्व ही केंद्र सरकार ने जनपद के तीन बड़े मुख्य मार्गों का निर्माण केंद्रीय मार्ग निधि से कराने का फैसला लेते हुए, कुल 126.89 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी थी। इन तीन मार्गों में ललितपुर से राजघाट मार्ग, ललितपुर-देवगढ़ मार्ग और जखौरा-राजघाट मार्ग शामिल है। गौरतलब है कि हाल ही में बीते विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इन  तीनों सड़कों के नाम पर जनता से वोट देने की अपील की थी। कहीं न कहीं जनता  ने इस अपील को स्वीकारा भी था, जिसका नतीजा भाजपा के प्रत्याशियों की भारी  वोटों से जीत है। लोक निर्माण विभाग उक्त तीनों मार्गों पर सड़क निर्माण के कार्य का टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करके कार्यदायी संस्था को वर्क ऑडर भी जारी किया जा चुका है। ठेकेदार ने कुछ दिन पूर्व सड़कों का निर्माण कार्य शुरू तो कर दिया था, लेकिन विभाग में बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य लगभग बंद पड़ गया है। केंद्र ने उक्त सड़कों के निर्माण के लिए स्वीकृत कुल 126.89 करोड़ रुपये की धनराशि के सापेक्ष अब तक मात्र 1.64 करोड़ रुपये ही विभाग को उपलब्ध कराए हैं, जो कुल बजट का दो प्रतिशत भी नहीं है। विभाग में बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानीय व ग्रामीण क्षेत्र की जनता को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ललितपुर शहर से देवगढ़ तक के मार्ग निर्माण की कुल लागत 53.77 करोड़ है, इसके सापेक्ष मात्र 69 लाख रुपये की उपलब्ध कराए गए हैं। इसी तरह ललितपुर से राजघाट तक के मार्ग निर्माण की कुल लागत 37.82 करोड़ रुपये है, जिसके सापेक्ष मात्र 49.17 लाख रुपये और राजघाट से जखौरा मार्ग के निर्माण की कुल स्वीकृत लागत 35.30 करोड़ के सापेक्ष मात्र 49.90 लाख रुपये की विभाग को उपलब्ध कराए गए हैं।                  

इन तीनों सड़कों का निर्माण केंद्रीय सड़क निधि से कराया जा रहा है। अब तक विभाग को नाम मात्र का ही बजट उपलब्ध हुआ है, जबकि ठेकेदारों ने बजट से कई गुना ज्यादा काम कर दिया है। बिना भुगतान किए ठेकेदारों पर दबाव भी नहीं बनाया जा सकता है। शासन से बजट उपलब्ध होते ही निर्माण कार्य में तेजी आ जाएगी।                  
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इं.एससी जैन                  
अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग।
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