जनपद में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत डाली कई सड़कों के जर्जर होने की नेशनल क्वालिटी मैनेजर द्वारा जांच की गई।
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद बड़ौनिया ने बताया कि मड़ावरा और महरौनी तहसील क्षेत्र के कई गांवों में करोड़ों रुपये की लागत से सड़के बनवाई थी। इनमें ठेकेदार और कार्यदायी संस्था द्वारा मानकों एवं गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाते हुए काफी घालमेल किया गया। महरौनी से नाराहट, महरौनी से सौजना, बम्हौरीकला से धौरीसागर और महरौनी-बानपुर-कैलगुवा, भैलेनी सूबा आदि सड़के अपने निर्माण कार्य के कुछ ही समय बाद ही उखड़ गई। ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुसंशा पर राजस्थान लोक निर्माण विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता के नेतृत्व में एक जांच दल पिछले दो दिनों से उपरोक्त सड़कों की जांच में जुटा है।
सोमवार को एनक्यूएम जांचदल द्वारा बम्हौरीकला से धौरीसागर तक 18 किमी लंबी सड़क निर्माण में उपयोग की गयी सामग्री की गुणवत्ता एवं मात्रा की जांच के लिये कई पिट खुदवाकर नमूनों का परीक्षण किया गया। धौरीसागर सड़क पर किमी संख्या 13.970 पर बनाये गये पिट में जी-2 लेयर में गिट्टी की मात्रा एवं साइज अधोमानक मिले। साथ ही सड़क के निर्धारित पेवमेंट अनुरूप मिट्टी का स्लोव बने हुये नहीं पाये गये। धौरीसागर से बम्हौरीकला की ओर सड़क निर्माण के लिये सड़क के दोनों ओर बनाये गये रिफरेन्श पिलर भी नहीं पाये गये, जिससे प्रतीत होता है कि सड़क के निर्धारित पेवमेंट में अनियमितता बरती गई है। एनक्यूएम जांचदल ने किमी संख्या 13.600 पर बनाये गये पिट में कुछ हद तक सामग्री मानकों के अनुरूप मिली। मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों में सड़क निर्माण में काफी घटिया और स्थानीय सामग्री लगाये जाने का आरोप लगाते हुए बताया कि सड़क निर्माण में बिट्यूमिन (कोलतार) की मात्रा भी काफी कम डाली गई है। एनक्यूएम जांचदल के मुखिया ने बताया कि महरौनी से नाराहट एवं सौजना रोड बिल्कुल ही डेड स्थिति में मिली है, जिसकी रिपोर्ट मंत्रालय को दी जाएगी। साथ ही अन्य सड़कों की जांच में जो भी तथ्य सामने आए है उनकी रिपोर्ट भी भेजी जाएगी।