ललितपुर। अरबों रुपये खर्च करके जनपद में एक के बाद एक बांध तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन इनका पूरा फायदा किसानों को नहीं मिल पा रहा है। न उन्हें मुआवजा मिल पा रहा है और न ही हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई हो पा रही है। इस कारण किसान परेशान हैं। सिंचाई विभाग इस ओर गौर न करके दूसरी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये बर्बाद कर रहा है।
किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए महरौनी तहसील के ग्राम चौका के पास स्थित रोहिणी बांध पर लोअर रोहिणी बांध का निर्माण सिंचाई निर्माण खंड तीन ने कराया है। 174.26 करोड़ रुपए से निर्मित इस बांध से 1900 हेक्टेयर कृषि भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी। वर्ष 2014 में बांध का सिंचाई मंत्री ने उद्घाटन कर दिया, लेकिन दो वर्ष बीतने के बाद भी इस बांध से किसानों को पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है। और तो और बांध के लिए 693.14 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की गई, जिसमें वन विभाग की अनुमति के बिना 32 हेक्टेयर जमीन को भराव क्षेत्र में ले लिया गया। अभी भी 238.96 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा वितरित नहीं हुआ है, जिस कारण बांध को पूर्ण क्षमता से नहीं भरा जा रहा है।
कमोबेश यही हाल कचनौंदा बांध का है। इस बांध से 1,080 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था। सिंचाई के लिए चार किमी लंबी नहरों के निर्माण को 35 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था, लेकिन अभी तक एक इंच जमीन नहीं ली गई है। दिखाने के लिए जरूर बांध की तलहटी से दाईं व बाईं ओर करीब सौ मीटर नहर का निर्माण किया गया है, लेकिन बजट के अभाव में नहरों का निर्माण नहीं हो पाने का दुखड़ा रोने वाले सिंचाई विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च केवल सौंदर्यीकरण, विश्रामगृह व हेलीपेड बनाने में खर्च कर दिए। नहरें न बनने से इस वर्ष कचनौंदा बांध के आसपास के गांवों में सैकड़ों एकड़ खेतों में फसल बोई तक नहीं गई।
लोअर रोहिणी बांध से इस वर्ष सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। भावनी बांध के कमांड एरिया में भी परिवर्तन किया गया है। इस बांध से निकली नहरों को गोविंद सागर बांध से जोड़कर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
बीबी सिंह, अधिशासी अभियंता, सिंचाई निर्माण खंड।
कचनौंदा बांध की नहरों के लिए व किसानों के मुआवजे के लिए बजट की मांग की गई है। बजट मिलते ही नहरों का काम शुरू हो जाएगा।
नरेंद्र जाड़िया, अधिशासी अधिकारी, आईसीडी तृतीय।
जमड़ार बांध का पानी कहां जाएगा
सिंचाई निर्माण खंड माताटीला द्वारा महरौनी-सौजना रोड पर जमड़ार बांध बनाया जा रहा है। इस बांध से बम्हौरी बहादुर सिंह, अगौरा, जखौरा गांव में नहर द्वारा पानी पहुंचाने की योजना है। खास बात यह है कि इन तीनों गांवों में जामनी बांध व पाली तालाब से सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध है। अगौरा गांव के बाद से मध्य प्रदेश की सीमा लग जाती है। इस प्रकार बांध की इस नहर को आगे ले जाना संभव नहीं है।
पूर्व शिक्षक प्रताप सिंह परिहार ने जमड़ार बांध की उपयोगिता को लेकर कई बार सिंचाई बंधु की बैठक में सवाल उठाए, लेकिन कभी भी उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। वह बताते हैँ कि बांध की तलहटी में बसे गुढ़ा, रुकवाहा, भदौरा, छापछौल, मैगुंवा गांव के लोग इंतजार कर रहे थे कि उनके गांव में नहर आएगी और सिंचाई का संकट खत्म हो जाएगा। लेकिन इन गांवों में कोई नहर नहीं जा रही है। हालांकि आईसीडी माताटीला के एक्सईएन अविनाश मिश्रा का कहना है कि बांध से भले ही दूसरे बांध के कमांड एरिया में नहरें जा रही हैं, लेकिन इससे फायदा किसानों को ही होगा।
भावनी बांध से कहां करेंगे सिंचाई
बार ब्लॉक में सजनाम नदी पर भावनी बांध बनाया जा रहा है। इस बांध का जो कमांड एरिया चुना गया वहां सिंचाई के लिए जरूरत ही नहीं थी। यह मामला प्रकाश में आने पर आनन- फानन में बांध की ड्राइंग बदली गई, जिससे लागत भी बढ़ गई है। अब भी जो कमांड एरिया चुना गया है, उसमें पहले से गोविंद सागर बांध की नहरें निकली हुई हैं।
जनपद में बांध
गोविंद सागर बांध, माताटीला बांध, राजघाट बांध, जामनी बांध, रोहिणी बांध, लोअर रोहिणी बांध, सजनाम बांध, उटारी बांध, कचनौंदा बांध, शहजाद बांध हैं। भावनी व जमड़ार बाँध पर काम चल रहा है, जबकि भौंरट बांध के लिए स्वीकृति मिल चुकी है। बालाबेहट में रबर बांध प्रस्तावित है।